खरसावां: खरसावां विधायक दशरथ गगराई ने पीएचइडी के इंजीनियर्स के साथ रायजामा, मुनगाटोला और फेचांगटोला का दौरा कर पानी की समस्या के समाधान की पहल की. फिलहाल तीनों ही गांव के पास स्थित पहाड़ियों के बीच से निकलने वाले प्राकृतिक जलस्रोतों को ग्रामीणों ने पाइपलाइन और बांस के सहारे अपने टोलों तक पहुंचाकर पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की है. इसी पानी से तीनों ही गांवों के लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए पानी मिल रहा है.विधायक दशरथ गागराई ने पीएचइडी के अभियंताओं के साथ प्राकृतिक जल स्रोतों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति को देखा. उन्होंने प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी साफ करने की व्यवस्था कर घरों तक पानी पहुंचाने की भी बात कही. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों से खेती में सिंचाई समेत अन्य जरुरतों को लोग पूरा कर सकेंगे. विधायक दशरथ गागराई ने उम्मीद जताई है कि पेयजल समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा. (नीचे भी पढ़े)
इसके लिए राशि की कमी नहीं होगी. जरूरत पड़ने पर विधायक फंड से राशि उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही विधायक फंड से दो चबुतरा बनाने की भी बात कही. पीएचइडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित इंदूवार ने कहा कि जल्द ही डीपीआर तैयार कर सौंप दिया जाएगा. मौके पर मुख्य रूप से पीएचइडी एई मांगीलाल गिलुवा, जेई प्रकाश रंजन गुप्ता, ग्रामीण सायना सरदार, उपेंद्र सरदार, जगन सरदार, लखन सरदार, अरुण जमुदा, गुरुचरण लोहार, लालू हांसदा, लक्ष्मण सरदार, मनो सरदार, रुइया सरदार, साधु चरण सोय, राम हांसदा आदि मौजूद थे. खरसावां-रड़गांव मुख्य मार्ग पर रांची के तमाड़ क्षेत्र से सटा रायजामा, फेचांगटोला और मुनगाटोला आदि गांव वर्ष 2023-24 तक घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता था. पिछले दो वर्षों में नक्सली गतिविधियां समाप्त होने के बाद अब यहां विकास की नई उम्मीद जगी है. ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से करीब 600 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों से पाइप और बांस जोड़कर पानी को गांव तक पहुंचाया है. (नीचे भी पढ़े)
चूंकि पानी ऊंचाई से आता है, इसलिए बिना किसी मोटर या पंप के भी तेज गति से नीचे पहुंच जाता है. रायजामा की पहाड़ियों में वर्ष भर पानी का प्रवाह बना रहता है, जिससे खेतों की सिंचाई भी हो जाती है. समय-समय पर पाइप और बांस की मरम्मत भी ग्रामीण खुद मिलकर करते हैं. 71 परिवारों वाले रायजामा गांव में सरकार की एक सोलर संचालित मिनी जलमीनार चालू है. लेकिन इससे ग्रामीणों की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती है. वहीं करीब 12 परिवारों वाले फेचांगटोला की स्थिति और भी खराब है. यहां एक भी चापाकल या जलमीनार नहीं है. इस टोला के लोग पूरी तरह पहाड़ी से निकलने वाले प्राकृतिक शीतल जल पर ही निर्भर हैं. इसी पानी से उनका खाना बनता है और घरेलू काम होते हैं. मुनगाटोला में एक सोलर संचालित जल मीनार है, लेकिन पाइप लाइन में लिकेज के कारण परेशानी होती है.







