
लेखक: बिजय कुमार सिंह. 
- बिजय कुमार सिंह, मानद सचिव, भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, पूर्वी सिंहभूम
जमशेदपुर : 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस उन लाखों रक्तदाताओं के सम्मान में मनाया जाता है जो नियमित रक्तदान करते हैं कि उनके रक्त से किसी की जान बचेगी। रेड क्रॉस पूर्वी सिंहभूम तथा जमशेदपुर के लिए यह गर्व की बात है कि इस शहर के रक्तदाता पूरे भारत वर्ष में सबसे जागरुक रक्तदाता माने जाते हैं। इस शहर में कठिन परिस्थितियों में भी जरूरतमंदों के लिए रक्त का अभाव नहीं होता, इसका श्रेय इस शहर के रक्तदाताओं को जाता है। रेड क्रॉस, पूर्वी सिंहभूम तथा जमशेदपुर ब्लड बैंक ने नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं में जागरुकता पैदा करने तथा जरूरतमंदों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने का सफल प्रयास किया है। जमशेदपुर के रक्तदाताओं ने कई संकटकालीन स्थितियों में रक्तदान के प्रति जो भावनात्मक सम्मान दिखाया है वह एक उदाहरण है। (नीचे भी पढ़ें)
कोरोना की कठिन परिस्थितियों में जब एक भी व्यक्ति का घर से बाहर निकलना मुश्किल था वैसी परिस्थिति में भी जरूरतमंदों के रक्त की आवश्यकता को ध्यान में रखकर 2020 और अभी वर्तमान 2021 में हजारों रक्तदाताओं ने आगे बढ़कर रक्तदान किया, इसके साथ ही प्रत्येक वर्ष शरीर का पानी सोख लेने वाली इस शहर के गर्मी के मौसम में जब रक्त की जरूरत बढ़ जाती है और रक्तदान शिविर कम होने लगते हैं ऐसे समय पूरी गर्मी में रेड क्रॉस के आान पर रिकार्ड रक्तदान होता है। 8 मई विश्व रेड क्रॉस दिवस तो जैसे रक्तदाताओं के लिए एक महोत्सव बन जाता है। इस दिन तथा 1 अक्टूबर विश्व रक्तदान दिवस पर लोग रक्तदान के लिए उमड़ पड़ते हैं। हमने बीते वर्ष कई ऐसी परिस्थितियां देखी जब मानवता पर संकट आन पड़ी लेकिन रक्तदाताओं ने इस संकट को बार बार टाला। वर्तमान समय में जब कोविड-19 के साथ ही उसके वैक्सीनेशन को लेकर आया कि रक्तदाता चार सप्ताह तक वैक्सीनेशन ने बाद रक्तदान नहीं कर पायेंगे, ऐसे में युवाओं ने पहले रक्तदान किया और बाद में वैक्सीनेशन करवाया। वर्तमान दिशानिर्देश में अब वैक्सीनेशन के 14 दिन बाद रक्तदाता रक्तदान कर सकते हैं। (नीचे भी पढ़ें)
इस शहर के प्रत्येक रक्तदाता ने यही संकल्प लिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो, कोरोना हो या हो गर्मी, सर्दी शहर में रक्त का अभाव नहीं होने देंगे। रक्तदाताओं का आभार तो वे सभी जीवन भर मानते हैं, जिन्होने रक्त की कमी के समय इसे पाकर नया जीवन पाया। रेड क्रॉस, पूर्वी सिंहभूम भी पूरे कृतज्ञता से मानव जीवन की रक्षा के लिए रक्तदान करने वाले प्रत्येक रक्तदाता का सम्मान करती है, और इसी उपलक्ष्य में रक्तदाताओं के सम्मान और नये रक्तदाताओं को जोड़ने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 14 जून को रक्तदाता दिवस के रूप में मनाते हुए रेड क्रॉस सोसाइटी, पूर्वी सिंहभूम द्वारा रक्तदान शिविर सह सम्मान समारोह का आयोजन किया जाता रहा है। इस वर्ष कोविड-19 प्रोटोकोल का ध्यान रखते हुए सम्मान समारोह का आयोजन न करते हुए, प्रत्येक रक्तदान करे वाले रक्तदाता को रक्तदान के साथ ही सम्मानित किया जायेगा। वर्तमान में ये विज्ञान का वरदान ही है, जिसने रक्तदान को एक ओर जहां जरूरतमंदों के लिए जीवनदान साबित किया वहीं रक्तदाता के स्वास्थय के लिए भी हितकर बताया और अब उससे बढ़कर एक रक्तदाता के रक्त से चार लोगों की जीवन रक्षा हो सकती है। ये संभव हुआ रक्त के कम्पोनेंट के विभाजन से, जिससे जिस तरह के रोगी को रक्त के जिस भाग की आवश्यकता हो, उसे पुर्ण रक्त न देकर उसके जरूरत का पृथक रक्त भाग दिया जाता है। (नीचे भी पढ़ें)
आज रक्त को चार भागों में विभाजित किया जाता है, जिसके तहत पैकशेल या रेड ब्लड शेल, प्लेटलेट कन्सट्रेट, फ्रेश फ्रोजेन प्लाज्मा और फैक्टर VIII आते हैं। 14 जून ए, बी तथा ओ ब्लड ग्रुपिंग सिस्टम के महान खोजकर्ता वैज्ञानिक नोबल पुरस्कार विजेता कार्ल लैण्डस्टेनर का जन्मदिन है। इसलिए इस दिन का और भी विशेष महत्व है। इस दिन को पूरे विश्व में रक्तदान अभियान के प्रति समर्पित अन्तर्राष्ट्रीय रेड कोस सोसाईटी तथा रेड क्रिसेन्ट सोसाईटी, विश्व स्वास्थ्य संगठन, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लड डोनर्स आर्गेनाइजेशन्स, इंटरनेशनल सोसाईटी ऑफ ब्लड ट्रांस्फ्यूजन तथा रेड क्रॉस की विभिन्न राष्ट्रीय एवं स्थानीय शाखाएं पूरे विश्व में रक्तदाताओं के सम्मान दिवस के रूप में मनाती है। 14 जून विश्व रक्तदाता दिवस एक ऐसा अवसर प्रदान करता है, जिस दिन हम रक्तदान के माध्यम से दूसरों को जीवन का उपहार देने वाले महान रक्तदाताओं के प्रति आभार प्रकट करते हैं। (नीचे भी पढ़ें)
दुनिया के हर कोने में हर पल किसी न किसी को जीवित रहने के लिए रक्त की आवश्यकता पड़ती है। रक्त की कमी का शिकार एनीमिया, थैलेसिमिया से ग्रस्त बच्चे, मलेरिया, डेंगू, मैलन्युट्रिशन, सड़क दुर्घटनाओं के शिकार, गर्भवती महिलायें विशेषकर होती हैं। कई मामलो में रक्त के अभाव में इनके शिकार अकाल मौत को पाते हैं, ऐसी मौतों पर रक्तदाताओं के सहयोग से ही काबू पाया जा सकता है। दुनिया में हर कोने में ऐसे लाखों लाख रक्तदाताओं की जरूरत है जो अपने रक्त से दूसरों का जीवन बचा सकें। इसके लिए आवश्यक है कि अधिक से अधिक लोग खास कर18 वर्ष के ऊपर के छात्र और नौजवान रक्तदान के प्रति समर्पित हों। रक्तदाता जहां अपने रक्त से दूसरों के जीवन की रक्षा करते हैं वहीं रक्तदान से वे स्वयं भी स्वस्थ एवं प्रसन्न रहते हैं। दूसरों के जीवन रक्षा की एक अजीब सी अनुभूति हर रक्तदाता के दिल में होती है। उसका रक्त किसे दिया जाएगा और किसकी जान बचेगी यह जाने बिना निःस्वार्थ भाव से रक्तदान करना उसी अनुभूति का परिणाम होता है। भारतीय रेड क्रास सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम नगर एवं जिले के उन सभी रक्तदाताओं के प्रति हार्दिक सम्मान प्रकट करती है, जो रेडक्रास के रक्तदान शिविरों के साथ साथ विभिन्न संगठनों के माध्यम से रक्तदान कर अमूल्य मानव जीवन की रक्षा करते हैं। आज जरूरत इस बात की है कि हम स्वयं तो रक्तदान करें ही, औरों को भी रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करें।







