
रांचीः झारखंड विधानसभा में 30 अक्टूबर को प्रथम झारखंड छात्र संसद 2021 का आगाज हो गया है. दो दिवसीय इस छात्र संसद में राज्य भर से चयनित 24 छात्र भाग ले रहे हैं. कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई. छात्र संसद के जरिये संसदीय परंपरा की जानकारी छात्रों को दी जाएगी. नाटकीय अंदाज में चलने वाले इस छात्र संसद में वो सारी कार्यवाही होगी जो विधानसभा सत्र के दौरान देखने को मिलती है.भारतीय छात्र संसद के कार्यक्रम में शामिल हुए राज्यपाल रमेश बैस, युवाओं को किया संबोधितऐतिहासिक है छात्र संसदछात्र संसद का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभाध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो और संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने छात्रों की हौसलाअफजाई की. (नीचे भी पढ़े)
मुख्यमंत्री ने इस छात्र संसद को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे संसदीय व्यवस्था के बारे में युवाओं को जानकारी मिलेगी. ऐसे कार्यक्रमों से युवाओं को अपने आपको अभिव्यक्त करने का अच्छा प्लेटफार्म मिलता है.लोकतंत्र का मंदिर बनाने की सोचें. वहीं स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो ने खुशी जताते हुए कहा कि समय का तकाजा है कि डेमोक्रेटिक व्यवस्था को बनाए रखे, जिससे इसकी व्यापकता की जानकारी सबको मिले. (नीचे भी पढ़े)
अपने संबोधन में स्पीकर ने सदन की गरिमा पर आ रही आंच पर चिंता जताते हुए कहा कि सदन को कॉफी हाउस न बनाकर लोकतंत्र का मंदिर बनाने की सोच रखनी चाहिए.समाजसेवा का करना खराब नहीं है. चुंकि वर्तमान समय में समाजसेवा के बारे लोग हिन भावना से देखते है, यदि लोग समाजसेवा की भावना का ख्याल रखते हुए राजनीति करें तो अच्छी बात है. इसके माध्यम से लोग समाज को नयी दिशा दे सकते है. समाज का उत्थान हो सकता है. जब तक समाज का उत्थान नहीं होगा तब तक लोगों को विकास संभव नहीं है. (नीचे भी पढ़े)
छात्र संसद में पहुंचे छात्रों का कहना है कि राजनीति के माध्यम से लोग समाज को नयी दिशा दे सकते है लेकिन लोग में समाज सेवा की भावना होनी चाहिए. आज के समय में लोग राजनीति करने वाले को हिन भावना से देखते है. चुंकि वर्तमान समय में ज्यादातर राजनेता इसी अवधारणा को लेकर चलते है. आज विधाय़क या सांसद दागी होने के बावजूद विधानसभा व लोक सभा पहुंचे है. पहले के नेताओं में कुछ सेवा भाव था जिसके चलते विकास हुआ. लेकिन समय के साथ राजनीति करने वाले में परिवर्तन आय़ा. नेता सिर्फ मलाई खाने में ज्यादा ध्यान देते है.समाज हित कार्यो में उदासीनता दिखाते है. (नीचे भी पढ़े)
इन्हीं सभी कारणों से छात्र राजनीति में जाने से कतराते है. राजनीति की अवधारणा को दूर करने के लिए राज्य के अलग अलग जिलों से आए छात्रों ने अपने अपने तरीके से राजनीति में आने में संदेश दिया. ज्यादातर छात्रों का कहना है कि उनकी रुचि सिविल सेवा में जाने का है, इसके बाद समाजसेवा में जाने की प्राथमिकता पर जोर दिया. छात्र संसद में पहुंचने वाले ज्यादातर छात्र अपने अपने तरीके से राजनीति में आने का संदेश दिया और कहा कि राजनीति में आने का मुख्य समाज सेवा है ताकि समाज के नयी दिशा मिल सके. इसमें गिरिडीह, कोडरमा, लोहरदगा, दुमका, पलामू, गढवा, देवघर, जामताड़ा, लातेहार के छात्र प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इसी तरह का पूर्वी सिंहभूम से कौरवी पात्रा ने अपना संदेश दिया. (नीचे भी पढ़े)
विधानसभा सभागार में आयोजित छात्र संसद के पहले दिन दो सत्र आयोजित होंगे. पहले सत्र का आयोजन उद्घाटन सत्र के बाद और दूसरे सत्र का आयोजन भोजनावकाश के बाद होगा. इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष में बंटे सभी 24 छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. दूसरी ओर अंतिम दिन छात्र संसद आयोजित होगी. इस दौरान सत्ता पक्ष, विपक्ष में बंटे छात्र-छात्रा विधायी कार्य करते नजर आएंगे.सदन में प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण आदि के अलावा गरमागरम बहस भी होती दिखेगी. कोई स्पीकर की भूमिका में होगा तो कोई नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री. सभी अपने-अपने ढंग से सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे. इधर इस छात्र संसद में राज्यभर से भाग ले रहे छात्र-छात्राओं को खुशी का ठिकाना नहीं था. सरकार की इस पहल की छात्राओं ने जमकर सराहना की.




