रांची: सीएम हेमंत सोरेन के प्रेस सलाहकार अभिषेक श्रीवास्तव उर्फ पिंटू व महाधिवक्ता के बीच बातचीत का ऑडियो लीक होने के मामले में चौथे दिन सदन गरमाया. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा के विधायकों ने महाधिवक्ता राजीव रंजन को बर्खास्त करने की मांग की. सूचना के माध्यम से बिरंचि नारायण ने कहा कि महाधिवक्ता अपराधियों को मदद पहुंचा रहे हैं. ऐसे में राज्य सरकार उन्हें तुरंत बर्खास्त करे. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से हो. इसे लेकर भाजपा के विधायक वेल में पहुंचकर हंगामा करने लगे. मामला यह है कि सीएम हेमंत सोरेन के प्रेस सलाहकार और महाधिवक्ता के बीच की कथित बातचीत का ब्यौरा मीडिया के जरिये सार्वजनिक हुआ है. दोनों के बीच की बातचीत का ऑडियो ईडी ने चार्जशीट में दिया है. जिससे खबर निकली है कि पंकज मिश्रा को मदद पहुंचाने में महाधिवक्ता ने भूमिका निभाई है.झारखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान आजसू विधायक लंबोदर महतो ने जन वितरण प्रणाली से जुड़े हुए सवाल उठाया.(नीचे भी पढ़े)
कहा कि पीडीएस दुकानदारों को विगत 16 महीने से कमीशन की राशि का भुगतान नहीं किया गया है. जिससे उनके समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गई है. उन्होंने सरकार से कमीशन भुगतान करने की मांग की. जवाब में प्रभारी मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभुकों को एक रुपये प्रति किलो की दर से जविप्र की दुकानों से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है. डीलरों को एक रुपया कमीशन के रूप में जाता है. इस योजना में डीलर का कोई कमीशन बकाया नहीं है. उन्होंने कहा कि कोरोना काल में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना चलाई गई थी. इसके तहत राज्य सरकार को केंद्र से चार महीने की राशि प्राप्त हुई है जो 90 करोड़ 87 लाख है. बाकी 60 करोड़ रुपया केंद्र सरकार के पास बकाया है. उन्होंने कहा कि 3 महीने के अंदर बची हुई राशि का भुगतान कर दिया जाएगा.(नीचे भी पढ़े)
साथ ही सहारा इंडिया द्वारा लोगों का पैसा हड़पने का मामला उठाया. आजसू विधायक लंबोदर महतो ने सरकार से पूछा कि जमाकर्ताओं का पैसा निकालने के लिए क्या किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि झारखंड में सिर्फ गोमिया प्रखंड के 18 हजार 500 जमाकर्ताओं ने 274 करोड़ रुपया जमा कराए हुए हैं. जिस पर राज्य सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि सहारा इंडिया का मामला राज्य सरकार के अधीन नहीं आता है.इधर चाईबासा के विधायक दीपक बिरुआ ने पश्चिमी सिंहभूम जिले में पोषाहार राशि नहीं मिलने से 2330 आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े 50 हजार से अधिक बच्चे, गर्भवती व धात्री माताओं को पोषाहार बंद होने का मामला उठाया.(नीचे भी पढ़े)
कहा कि पोषाहार के आवंटन नहीं होने से उधार लेकर पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा था उसे भी बंद कर दिया गया. जवाब में मंत्री जोबा मांझी ने कहा कि जनवरी के प्रथम सप्ताह में राशि का भुगतान कर दिया जाएगा.सत्ता पक्ष की विधायक अंबा प्रसाद ने सदन में अपनी ही सरकार पर आरोप लगाया है. तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछे गए सवाल पर मिले सरकार के जवाब से वह नाराज थीं. उन्होंने स्पीकर से कहा कि सदन में आश्वासन मिलने के बाद भी काम नहीं होता है. दरअसल अंबा ने यह पूछा था कि क्या सरकार बड़कागांव और केरेडारी में हो रही बिजली समस्या से निजात के लिए फीडर निर्माण का विचार रखती है.
बांध और नहर को लेकर मिथिलेश व बाउरी में नोंकझोंक
सदन में भाजपा विधायक अमर बाउरी के सवाल पर सरकार के जवाब के दौरान मंत्री मिथिलेश ठाकुर के बीच हल्की नोकझोंक हुई. जवाब से असंतुष्ट अमर बाउरी ने स्पीकर से कहा कि सरकार को डांटिये. जिसपर जवाब देने के लिए खड़े हुए मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि आप गलतफहमी में ना रहें कि सिर्फ आपको ही जानकारी है.दरअसल, अमर बाउरी ने पूछा था कि क्या सरकार चास प्रखंड के केलिया डाबर में 10 एकड़ से अधिक में फैले लोतन बांध का जीर्णोद्धार कराना चाहती है. इसी का जवाब देते हुए मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा था कि सवाल पूछने से पहले आप जान लें कि वह बांध नहीं है, नहर है. जल संसाधन विभाग के अंदर नहर नहीं आता है. इसी के बाद दोनों में नोंकझोंक हुई.
रिम्स की व्यवस्था में होगा सुधार- बन्ना गुप्ता
विधानसभा में सरकार ने भरोसा दिया है कि रिम्स की व्यवस्था में और भी सुधार किया जायेगा. शीतकालीन सत्र में रिम्स की व्यवस्था पर मचे बवाल के बीच स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि रिम्स की व्यवस्था में सुधार हो रहा है. व्यवस्था को सुधारने की कोशिश में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा के विधायक समरीलाल उनके भाई हैं और उन्हें रिम्स की चिंता रहती है, इसलिए वह उन्हें यह भरोसा दिलाने आये हैं कि रिम्स की व्यवस्था में सुधार होगा. विदित हो कि शीतकालीन सत्र के चौथे दिन गुरूवार को कांके विधायक समरी लाल विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के पूर्व विशेष अंदाज में धरना देकर रिम्स में मरीजों की व्यवस्था की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने का प्रयास किया था.












