जमशेदपुर: केंद्रीय बजट 2026 के संदर्भ में झारखंड फेडरेशन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष एवं सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के निवर्तमान अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने सरकार के समक्ष अपने महत्वपूर्ण सुझाव एवं विचार रखे हैं.श्री मूनका ने कहा कि वर्तमान समय में सरकार द्वारा दी जा रही अत्यधिक फ्रीबी योजनाएं जैसे मुफ्त राशन, मुफ्त यात्रा एवं अन्य सुविधाएं समाज में कार्य संस्कृति को कमजोर कर रही हैं. जब बिना श्रम के आवश्यकताएं पूरी होने लगती हैं, तो लोगों में काम करने की प्रवृत्ति घटती है, जो किसी भी राष्ट्र के लिए दीर्घकालिक रूप से घातक है.(नीचे भी पढ़े)
उन्होंने कहा कि ईमानदार करदाता वर्ग आज स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहा है. मेहनत और निवेश से अर्जित आय पर कर चुकाने वाले नागरिकों की राशि को विकास के बजाय मुफ्त सुविधाओं में बांटना करदाताओं का मनोबल गिराता है. करदाताओं का योगदान राष्ट्र के विकास, उद्योग, आधारभूत संरचना और भविष्य की मजबूती के लिए होना चाहिए, न कि अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए. श्री मूनका ने जोर देते हुए कहा कि सरकार को कर राजस्व का उपयोग देश के बुनियादी ढांचे एवं औद्योगिक विकास में करना चाहिए. सड़कें, रेलवे, हवाई अड्डे, मेट्रो, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल तथा राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाएं देश की रीढ़ हैं.(नीचे भी पढ़े)
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए. विकास परियोजनाओं के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराकर लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है. इससे न केवल कार्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सामाजिक सहभागिता और सकारात्मक सोच भी विकसित होगी, जो मुफ्त योजनाओं से संभव नहीं है.वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए श्री मूनका ने कहा कि दोनों ही क्षेत्र पूरी तरह से व्यवसायिक हो चुके हैं. चाहे स्कूली शिक्षा हो,उच्च शिक्षा हो या स्वास्थ्य सेवाएं इनकी बढ़ती लागत आम नागरिक की पहुंच से बाहर होती जा रही है.
उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि केंद्रीय बजट 2026 में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ठोस सुधार एवं व्यापक निवेश की घोषणा हो, जिससे गुणवत्तापूर्ण और सुलभ सेवाएं आम जनमानस तक पहुंच सकें.
अंत में श्री मूनका ने कहा कि एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए फ्रीबी संस्कृति से हटकर विकास, रोजगार और सुधारों पर आधारित बजट समय की आवश्यकता है.



