रांची : झारखंड कांग्रेस में सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के विरोध के बाद प्रदेश कमेटी से उनके बेटे ने इस्तीफा दे दिया था. अब वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश के प्रभारी के राजू को एक पत्र भेजा है. इस पत्र में प्रदेश कमेटी को लेकर लिये गये फैसले पर सवाल उठाये है. जनहित के मुद्दे पर प्रदेश नेतृत्व के मौन रहने का विरोध किया है. अपने पत्र में वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन का कार्य सार्वजनिक स्तर पर होता है. हम जो करते हैं, वह जनता को बताते हैं. (नीचे भी पढ़े)
यदि हम कुछ नहीं भी बताते हैं तो जनता जानती है कि पार्टी संगठन में क्या चल रहा है. यदि पार्टी हित की बात सार्वजनिक की जाए तो यह कभी पार्टी विरोधी नहीं माना जा सकता. वित्त मंत्री ने प्रभारी श्री राजू से पत्र के माध्यम से कहा है कि उनके द्वारा सार्वजनिक स्तर पर रखे गये मुद्दे पार्टी विरोधी हैं. फिर भी यदि उनको ऐसा लगता है, तो आपका जो भी निर्णय होगा उनको स्वीकार है. उन्होंने पार्टी प्रभारी से दो टूक कहा कि एक को साधिए, झारखंड कांग्रेस में सब सध जायेगा. वित्त मंत्री ने प्रभारी को भेजे पत्र में कहा है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की संख्या 314 के जगह पर 628 भी कर दिया जाये, तो क्या फर्क पड़ता है. यदि पार्टी राज्य स्तर के स्थानीय मुद्दों के प्रति मौन रहे तो समिति संख्या बल कितना भी बढ़ा दिया जाये, कोई असर नहीं पड़ने वाला है. (नीचे भी पढ़े)
वित्त मंत्री ने कुछ मामलों का हवाला देते हुए कहा है कि प्रदेश नेतृत्व उन मुद्दों पर मौन रहा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जिस बेहतर ढंग से महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर लोकसभा में तर्क प्रस्तुत किया. उसे झारखंड प्रदेश कांग्रेस राज्यव्यापी स्तर पर भाजपा के खिलाफ मुद्दा नहीं बना सकी. कांग्रेस भवन में प्रेस कांफ्रेंस करने से राज्य की महिलाओं के बीच महिला विरोधी भाजपा के बारे में संदेश नहीं दिया जा सकता है. पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, गोड्डा, धनबाद, बोकारो आदि जिलों में मगही और भोजपुरी भाषा बोली जाती है जबकि जेटेट में राज्य सरकार द्वारा दोनों भाषाओं को हटा दिया गया. इस महत्वपूर्ण विषय पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने चुप्पी साधे रखी. वित्त मंत्री ने कहा कि झारखंड में अनुसूचित जाति की आबादी 50 लाख है. उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 2025-2026 के बजट में विधानसभा में अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद और अनुसूचित जाति आयोग को पुनर्जीवित करने की मांग रखी थी. (नीचे भी पढ़े)
इन दोनों मांगों पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व मौन रहा. हजारीबाग के विष्णुगढ़ में एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार होता है. स्थानीय स्तर पर कांग्रेस नेता अवश्य गए थे, परंतु प्रदेश कांग्रेस कमिटी कहां सोयी हुई थी. हजारीबाग में तीन अल्पसंख्यकों की निर्मम हत्या कर दी गयी. प्रदेश नेतृत्व कहां सोयी हुई थी. श्री किशोर ने कहा है कि झारखंड सामाजिक न्याय का प्रदेश है. प्रदेश पार्टी नेतृत्व ये सार्वजनिक करे कि पार्टी संगठन के लिए कांग्रेसी नेताओं के परिवार को संगठन में कितना स्थान दिया गया है. उन्होंने कहा कि केशव महतो कमलेश को सार्वजनिक तौर पर यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 314 सदस्यों की कमेटी में दलित, पिछड़ों, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य जाति के लोगों को कितनी संख्या में स्थान दिया गया है.







