गिरिडीह : कृषि उपज एवं पशुधन विपणन बिल को राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही पूरे राज्य के व्यापारियों ने उद्वेलित हो आन्दोलन का रुख कर लिया है. देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आलोक मल्लिक ने बताया कि आज 8 फरवरी को सभी जिलों की तरह देवघर में भी खाद्यान्न व्यापार और उत्पादन बन्द रहा. (नीचे भी पढ़ें)

उधर रांची में फेडरेशन ऑफ झारखंड चैम्बर के अध्यक्ष किशोर मंत्री की अध्यक्षता में राज्य भर के व्यापारियों ने बैठक कर बिल के विरोध की रणनीति तैयार की. देवघर में खुदरा दुकानदार संघ के सचिव संजय बर्णवाल, संजय रुंगटा, पवन बर्णवाल, अनिल केशरी, थोक खाद्य विक्रेता पंकज भालोटिया, अर्जुन अग्रवाल, बाजार समिति के व्यापारी, राइस मिल एसोसिएशन के सदस्य व्यापार बन्दी को सफल बनाने में लगे रहे तो दूसरी ओर चैम्बर के अध्यक्ष आलोक मल्लिक की अगुवाई में राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश बाजला, देवघर चैम्बर के अध्यक्ष रवि केशरी, राजकिशोर चौधरी, प्रदीप खेतान, गणेश भालोटिया, राजेश टिबरेवाल, राजेश जैन और पशु आहार व्यवसायी अशोक जैन रांची में राज्यस्तरीय सम्मेलन में देवघर के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए. (नीचे भी पढ़ें)

चैम्बर अध्यक्ष श्री मल्लिक ने बताया कि राज्यस्तरीय बैठक में फेडरेशन के अधिकारियों, पूर्व अध्यक्षों तथा सभी जिलों एवं रांची के चैम्बर और व्यापारियों की बैठक के बाद चार सूत्री निर्णय लिये गये. इसके अनुसार राज्य सरकार को विधेयक वापस लेने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया. एक सप्ताह के अन्दर बिल वापस नहीं लिये जाने पर 15 फरवरी से पूरे राज्य में आवक-जावक और उत्पादन अनिश्चितकाल के लिए बंद रखने की घोषणा की गयी. इस बीच सभी जिलों में कृषि मंत्री बादल पत्रलेख का विरोध, पुतला दहन, घेराव आदि का आह्वान किया गया. बता दें कि कृषि उत्पादों पर 2 फीसदी शुल्क वसूली के प्रावधान को किसी भी हाल में नहीं मानने का निर्णय लिया गया. वहीं बैठक के बाद व्यापारियों ने रांची में रैली भी निकाल कर कृषि मंत्री बादल पत्रलेख का पुतला दहन भी किया. व्यवसायियों ने झारखण्ड सरकार एवं मुख्यमंत्री को व्यापारी विरोधी करार देते हुए उक्त विधेयक को पूरी तरह वापस लेने तक आन्दोलन जारी रखने का निर्णय लिया.



