जमशेदपुर : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 2014 से सारी परीक्षा की जांच कराने की घोषणा को लेकर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है. वहीं, उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि सभी मामलों की सीबीआई से जांच कराये. उन्होंने कहा है कि वे जब मुख्यमंत्री थे, तब कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी. उन्होंने अपने बयान में कहा है कि सात साल से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ओछी राजनीति करना बंद करें. (नीचे भी पढ़ें)
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2014 से जांच कराने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस निर्णय का स्वागत करते हुए छात्रों की मांग दोहराते है कि कि पूरे मामले की सीबीआई जांच करायी जाये. उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में जितनी परीक्षाएं हुई उनमें किसी भी परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली की शिकायत कभी भी किसी छात्र द्वारा नहीं किया गया ना ही आंदोलन हुआ. छठी जेपीएससी की परीक्षा में तकनीकी खामियों मसलन हिंदी और अंग्रेजी के नंबर को जोड़े जाने के सैद्धांतिक निर्णय को लेकर विवाद हुआ था. सीट बेचे जाने या बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप कभी भी नहीं लगे. रघुवर दास ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को यदि किसी प्रकार की गड़बड़ियों की शिकायत मिली थी तो वे 2019 से सत्ता संभालने के बाद से क्या कर रहे थे? उन्होंने किसी प्रकार की जांच क्यों नहीं करवायी? अब छात्रों की मांगों को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. छात्रों की तीन प्रमुख मांग रही है. इसमें जेपीएससी पीटी की परीक्षा रद्द करने, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने तथा सीबीआइ जांच प्रमुख मांग रही है. सरकार ने 9 अगस्त को जेपीएससी पीटी रद्द करने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है. इसमें एक पेंच है कि परीक्षा सरकार रद्द नहीं कर सकती है. (नीचे भी पढ़ें)
परीक्षा रद्द करने का अधिकार जेपीएससी के पास सुरक्षित है और जेपीएससी में न तो अध्यक्ष है न ही सदस्य. जेपीएससी अध्यक्ष और परीक्षा कंट्रोलर भी जेल में है. ऐसे में अधिसूचना जारी कौन करेगा. श्री दास ने कहा कि छात्रों को सीबीआई जांच से कम कुछ भी मंजूर नहीं क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का चाल, चरित्र, चेहरा उस समय बेनकाब हो गया, जब उनके खास मित्र और राजदार आर्किटेक्ट विनोद सिंह के घर हुई इडी रेड में बड़े पैमाने पर सीजीपीएल अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले थे. रघुवर दास ने राहुल गांधी पर भी हमला बोला और कहा कि कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में आंदोलनरत छात्रों की सभी मांग को वैध माना, यदि मांग वैध है, तो छात्रों की मांग के अनुरूप सीबीआइ जांच क्यों नहीं. श्री दास ने कहा कि राहुल गांधी से वे भी पूछना चाहते है कि उत्पाद सिपाही की दौड़ में जिन 19 आदिवासी और मूलवासी अभ्यर्थियों की मौत हुई उनसे मिलने या उन्हें मुआवजा देने की मांग उन्होंने अब तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से क्यों नहीं की है? क्या झारखंड के आदिवासी और मूलवासी छात्रों के जीवन की कोई कीमत नहीं है? कांग्रेस नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी रांची क्यों नहीं आ रहे हैं. क्या श्री राहुल गांधी डर से रांची नहीं आ रहे हैं क्योंकि हेमंत सोरेन ने उनसे कहा है कि अगर रांची आए तो चारों कांग्रेसी मंत्री को हटा देंगे और सत्ता से बाहर कर देंगे. सत्ता पक्ष के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यह जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को रांची नहीं आने की सलाह दी है. रघुवर दास ने कहा कि वे पक्के तौर पर दावे के साथ यह कह रहे है कि इसलिए चिट्ठी, सोशल मीडिया के माध्यम से लिख पढ़ रहे हैं. झारखंड में मुद्दा केवल घोटाले की जांच का नहीं है, जांच में घोटाले का है. सीआइडी जांच का उद्देश्य दोषियों को सजा दिलाना नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे प्रभावशाली लोगों और नौकरशाहों को बचाना और साक्ष्य मिटाना प्रतीत होता है. टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द किया गया है, जिसका स्वागत करते है. लेकिन इसी सीआइडी की जांच में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को क्लीन चिट दी गई थी, यानी सीआईडी खुद कटघरे में है. अब जांच कौन करेगा इसलिए छात्रों द्वारा मांग की जा रही है कि जेपीएससी पीटी परीक्षा, जेएसएससी सीजीएल की सभी परीक्षाओं का जांच सीबीआई से हो ताकि दोषियों को दंड मिल सके. रघुवर दास ने कहा कि जेएसएसपी सीजीएल परीक्षा में किसी को भी नौकरी से हटाने की शक्ति सरकार के पास है, क्योंकि अभी परीक्षमान पीरियड लागू है. लेकिन यह व्यक्तिगत मामलों में लागू होता है. सफल अभ्यर्थी के चरित्र या कार्य प्रणाली के आधार पर यह निर्णय लिया जा सकता है. लेकिन पूरी नियुक्ति के मामले में यह शर्त लागू नहीं होती है. वहीं सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार पूरी नियुक्ति को रद्द न कर मैरिट वाले अभ्यर्थी और दागदार अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना आवश्यक है. इसके लिए व्यापक जांच जरूरी है. जांच के बाद यदि कोई निष्कर्ष नहीं निकलता है, तब अंतिम विकल्प के रूप में पूरी नियुक्ति रद्द की जा सकती है. यह अंतिम विकल्प होना चाहिए. रघुवर दास ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितता की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश करें और उत्पाद सिपाही भर्ती दौड़ में आपकी व्यवस्था ने जिन 19 आदिवासी और मूलवासी छात्रों की जान ली उनके परिवारों को अविलंब एक-एक करोड़ का मुआवजा देने की घोषणा करें.




