गिरिडीह: गिरिडीह की सांस्कृतिक संस्था आईना ने शनिवार को पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत मधुबन में जल संरक्षण विषय पर एक नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया. नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने स्थानीय लोगों और देश के विभिन्न हिस्सों से आए जैन धर्मावलंबियों, यात्रियों को जल संरक्षण के बारे में जानकारी दी. लोगों को नाटक के माध्यम से बताया गया कि पानी बचाना हमारा नैतिक धर्म है. हमें अपने नैतिक धर्म का निर्वहन करना चाहिए और पानी को बहने से रोकना चाहिए. पानी है तो कल है. अभी एक महीने के बाद गर्मी का मौसम आ जाएगा,जिस समय पानी की आवश्यकता बढ़ जाएगी.(नीचे भी पढ़े)
नाटक के माध्यम से कलाकारों ने बताया कि बरसात का पानी चार महीना आता है और वह पानी जो अंडर ग्राउंड वाटर बन जाता है. उसी पानी का इस्तेमाल हम लोग शेष महीने तक करते हैं. इन महीनों में हमें ग्राउंड लेवल वाटर का सही इस्तेमाल करना चाहिए तथा पानी को बहने से रोकना चाहिए. नाटक में दिखाया गया कि अगर कहीं नल का पानी बह रहा है तो उसे बंद करना अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए. कलाकारों में अतुल लाभ, राहुल कुमार,तरुण सिंह, प्रगति वर्मा और निर्देशक महेश अमन थे.
नुक्कड़ नाटक के अंत में सभी को पानी बचाने संबंधित शपथ दिलाई गई.




