
रांची : झारखंड हाईकोर्ट में कोरोना को लेकर दो अलग-अलग सुनवाई हुई. पहले तो सबसे अहम रेमडेसिवीर कालाबाजारी के मामले की जांच के संबंध में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसादकी अदालत में सुनवाई हुई. इस सुनवाई में खुद सीआइडी के एडीजी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अदालत में हाजिर हुए. इसके तहत सीआइडी के एडीजी ने अदालत को बताया कि जांच चल रही है और निष्पक्ष चल रही है और सही दिशा में जांच चल रही है. इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि एक अधिकारी ने अपने बाडीगार्ड के जरिये रेमडेसिवीर इंजेक्शन का जुगाड़ करवाया, इस बिंदू पर जांच हो रही है या नहीं, इस पर एडीजी ने कहा कि हम सभी पहलुओं पर जांच कर रहे है, किसी को बख्शा नहीं जायेगा. सारे लिंक की जांच की जा रही है. निष्पक्ष जांच होगी. इस पर हाईकोर्ट ने एडीजी से पूछा कि क्या आपको जांच करने में डर लग रहा है. जांच के दौरान कोई आपको प्रभावित तो नहीं कर रहा है या जांच को कोई प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं कर रहा है. इस पर एडीजी ने कहा कि कोई प्रभावित नहीं कर सकता है. काफी प्रोफेशनल तरीके से जांच की जा रही है औरसारे बिंदूओं को अदालत के समक्ष लाया जायेगा. हाईकोर्ट काफी संतुष्ट एडीजी के जवाब से दिखा, जिसके बाद यह टिप्पणी की कि कोर्ट को यह भरोसा है कि जांच बेहतर तरीके से होगा. अगली सुनवाई 17 जून निर्धारित की गयी है. सुनवाई में सरकार का पक्ष महाधिवक्ता राजीव रंजन ने रखा. आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने बड़ी मछलियों को पकड़ने के लिए एडीजी को सुनवाई के लिए कोर्ट में बुलाया था.
दूसरी ओर, एक अन्य सुनवाई में चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने कोरोना से होने वाली मौत का अंतिम संस्कार धार्मिक रीति-रिवाज के साथ कराने की मांग को लेकर सुनवाई की. इस मामले में राज्य सरकार से 17 जून तक प्रति शपथ पत्र दायर करने को का गया है. इसके तहत सरकार को कहा गया है कि सरकार हलफनामा दायर कर बताये कि सरकार का क्या सोच है. जमशेदपुर के तितवंतो देवी महिला कल्याण संस्था के सचिव द्वारा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी है. इसमें कहा गया है कि जमशेदपुर में कोरोना से मरने वालों के परिजनों को शव नहीं दिया जा रहा है और धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करने नहीं दिया जा रहा है और शवों का अंतिम संस्कार प्रशाशन अपनी मर्जी से करा दे रहा है. इस मामले में टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) को भी याचिकाकर्ता ने पार्टी बनाया है. यह बताया गया है कि जमशेदपुर में टीएमएच में जिन संक्रमितों की मौत होती है, उनके शव को परिजनों को नहीं देकर जमशेदपुर प्रशासन को दे दिया जाता है. प्रशासन उनके परिजन को सूचित करता है कि कब और कितना बजे और कहा अंतिम संस्कार किया जायेगा. लेकिन परिजनों को यह नहीं बताया जाता है कि कैसे हो रहा है. कैसे अंतिम संस्कार हुआ, यह नहीं बताया जाता है. साथ ही जो परिजन शव का अंतिम संस्कार करना चाहते है, अथवा शव लेना चाहते है, उन्हें न तो शव दिया जाता है और ना ही अंत्येष्टि में उचित समय में भाग लेने दिया जाता है. इस मामले की सुनवाई अब 17 जून को तय की गयी है. गुरुवार को हु़ई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के गाइडलाइन के मुताबिक, कोरोना से मरने वालों के शव परिजनों को दिये जा सकते है, लेकिन जमशेदपुर के टीएमएच समेत राज्य के कई अस्पताल ऐसा नहीं कर खुद ही शवों का अंतिम संस्कार कर दे ररहे है. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने अदालत को बताया कि यह आरोप गलत है. इसके बाद कोर्ट ने सरकार को हलफनामा दायर करने को कहा गया है.






