रांची : भाजपा के वॉकआउट के बीच वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अनुपूरक बजट पर अपनी बात रखी. कहा कि हेमंत सरकार का वित्तीय प्रबंधन काफी मजबूत है. 4296.62 करोड़ का अनुपूरक बजट गांव में रहने वाले लोगों के चेहरे पर खुशी लाने के लिए सरकार की बुनियाद रखने के लिए लाया गया है.सदन में ध्वनिमत से अनुपूरक बजट पास हो गया. उन्होंने कहा कि मूल बजट एक लाख 45 हजार 400 करोड़ रुपए का है. इसमें स्थापना से ज्यादा 38 हजार करोड़ मूल बजट में व्यवस्था की गई है. मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने स्थापना से ज्यादा मूलबजट में प्रावधान किया है. योजना मद में साढ़े चार माह में 23,799 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जो लगभग 26.50 प्रतिशत है.(नीचे भी पढ़े)
जो पिछले साल की तुलना में दो से ढाई फीसदी अधिक है.राजस्व संग्रहण मामले में भी 33,707 करोड़ रुपये यानी 27 प्रतिशत राजस्व हासिल हुआ है, जो एक बड़ी उपलब्धि है. 2024-25 में अगस्त तक 18137.19 करोड़ यानि 23 फीसदी ही खर्च हुआ था. वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य का वित्तीय प्रबंधन इतना मजबूत है कि अभी तक बाजार से उधार लेने की जरूरत नहीं पड़ी. फिसिकल डिपिसीट तीन फीसदी की सीमा से काफी नीचे है. अगर अभी बाजार से कर्ज लेना चाहे तो 18 हजार करोड़ रुपए ऋण ले सकते हैं. बजट और योजना सुदृढ़ है.टैक्स मैनेजमेंट सफल है. खर्च पर भी नियंत्रण है. लेखांकन और रिपोर्टिंग सुदृढ़ है. राजकोषीय नियंत्रण मजबूत है. (नीचे भी पढ़े)
मंत्री ने कहा कि बहुत अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि साढ़े चार माह में केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी मामले में अनुदान की राशि सिर्फ 17 प्रतिशत मिली है. मंत्री ने बताया कि अनुपूरक बजट के माध्यम से आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए फंड उपलब्ध कराना जरूरी है. भारत सरकार से 1,476 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि सरेंडर राशि के रूप में 1,642 करोड़ रुपये मिलेंगे.राजकोष पर 1,177 करोड़ रुपये का अधिभार होगा, जिसमें 832 करोड़ रुपये पेंशन फंड की राशि सरेंडर होने से प्राप्त होगा. 345 करोड़ का वित्तीय भार पड़ेगा.



