गुड़ाबांदा : पूर्व नक्सली कान्हू मुंडा अपनी जीवन पर लिख रहें हैं. लेख में वें नक्सली क्यों बने और क्यों उठाया हथियार उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा उनपर हत्या का झुठा आरोप लगाकर उनपर किए गए अत्याचार और शोषण से त्रस्त होकर उन्होंने उस समय सिस्टम के खिलाफ हथियार उठाया था. पुस्तक प्रकाशित होने पर लोग भी जानेंगे की उन्होंने हथियार क्यों उठाया या संगठन में कितनी तकलीफ और समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अभी वे अपने जीवन पर आधारित लेख को हिन्दी में अनुवाद कर रहे हैं, जिसमें कुछ समय लगेगा. उन्होंने कहा कि कोई प्रकाशक मिलेगा तो जरूर पुस्तक को छपवाएंगे. इस जीवन लेख में सिर्फ संगठन का गुणगान करना मकसद नहीं है, बल्कि संविधान के सिस्टम से कार्य होगा तो कभी भी कोई सशस्त्र की लाड़ाई लड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने कहा कि अगर कभी भी क्षेत्र में पुनः नक्सलवाद पनपे तो सरकार को एक पॉलिसी बनाने में यह पुस्तक माध्यम बनेगा और सरकार भी सोचने पर मजबुर होगा कि कहां क्या गैप रह गया है और किसके कारण ऐसा हो रहा है और लोग भी सोचेंगे की संगठन में जाने का मतलब क्या है इसमें खतरा कितना है. उन्होंने कहा कि अपने जीवनी पर लेख लिखने की जरूरत तब महसूस कि जब वर्ष 2019 में फिल्म के डायरेक्टर इकबाल दुर्रानी उनसे मिलने घाटशिला जेल पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि वे उनके जीवनी से एक फिल्म बनाना चाहते थे. उन्होंने श्री मुंडा से संगठन में आने की वजह, हथियार उठाने की वजह, धालभूमगढ़ बीडीओ का अपहरण, सांसद सुनील महतो हत्याकांड, डोगादह और बुरूडीह एम्बुस समेत अन्य मुख्य घटनाओं की जानकारी ली और वे सबसे ज्यादा दुःखी कब हुए समेत अन्य जानकारी ली और क्षेत्र का भ्रमण किया. तब उन्होंने सोचा की जब फिल्म डायरेक्टर उनपर फिल्म बनाना चाहते हैं तो क्यों ना वे ही अपनी जीवन पर लेख लिखे और लिखना शुरू किया. (नीचे भी पढ़ें)

संगठन के विकास मॉडल कार्यों को सरकार ने अपनाया : कान्हू मुंडा ने बताया कि एक दिन संगठन बाकड़ाकोचा गांव में ग्रामीणों संग बैठक करने पहुंचे तो ग्रामीणों ने गांव में पेयजल की समस्या को रखते हुए सहयोग करने की मांग की. तब उन्होंने ग्रामीणों से कहा की संगठन से क्या मदद चाहिए तब लोगों ने बताया कि गांव से सटे शाकाभांगा पहाड़ से झरना के पानी को गांव तक पाइप लाइन से लाना चाहते हैं. तब उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि इस कार्य में संगठन आर्थिक मदद करेगी और आप सभी श्रमदान करें, जिसपर लोग भी राजी हो गए. शाकाभांगा पहाड़ के झरने की पानी को पाइप लाइन बिछाकर बाकड़ाकोचा गांव तक पानी पहुंचाने में संगठन ने ग्रामीणों को सामग्रीयों की खरीददारी करने के लिए उस समय 60 हजार रूपए उपलब्ध कराया था. पानी को गांव तक लाने में ग्रामीणों ने श्रमदान कर इस कार्य को सफल किया. पहाड़ से एक किमी दूर बाकड़ाकोचा गांव तक ग्रामीणों ने श्रमदान कर पाइप-लाइन बिछाकर पानी पहुंचाया और गांव में एक पक्का चौबच्चा बनाया गया, जहां झरना का पानी गिरता था और ग्रामीण वहीं से पीने के लिए पानी और दिनभर के घरेलू कार्य के लिए प्रयोग में लाने लगे. कान्हू मुंडा ने बताया कि फिलहाल उस गांव में जेल से आने के बाद नहीं जा पाए है इसकारण अभी क्या हाल है नहीं बोल पाएंगे. इसके आलावे संगठन के माध्यम से क्षेत्र में पानी की समस्या से जूझ रहे कई गांव में कुंआ और डोभा (तालाब) का निर्माण करवाया गया था. संगठन के इस कार्य से सरकार भी प्रभावित हुआ और बाद में उनकी मॉडल को अपनाते हुए जल संरक्षण के लिए सरकार योजना बनाकर पुरे झारखंड में डोभा निर्माण कार्य शुरू किया. उन्होंने कहा कि आदिबासी संस्कृति की रक्षा के लिए भी संगठन ने समय समय पर लोगों के बीच हैंडबिल छपवाकर लोगों के बीच वितरण कर लोगों को अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए जागरूक किया और आदिवासी नृत्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए संगठन के माध्यम से मादर, धमसा का वितरण किया. संगठन के इस कार्य को अपनाते हुए कुछ नेता और जन प्रतिनिधि भी लोगों के बीच मादर धमसा वितरण कार्य शुरू किया और छपल छपल नृत्य में शामिल होने से भागने लगे. (नीचे भी पढ़ें)

गुड़ाबांदा थाना से जियान गांव तक निर्मित सड़क जर्जर, विकास होना अभी है बाकी : विकास कार्य के मुद्दे पर बात करते हुए पूर्व नक्सली कान्हु मुंडा ने बताया कि गुड़ाबांदा थाना से कुड़ियान जियान तक निर्मित सड़क जर्जर है. सड़क से कालीकरण उखड़ गया है और पत्थर उभर आए है जिससे लोगों को सड़क पर आवागमन करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. परंतु कुड़ियान से उनके टोला पुर्णाडीह तक आने के लिए सड़क भी नहीं है. जियान गांव के पुर्णाडीह टोला जहां से नक्सलवाद की आग सुलगा वह टोला विकास से दूर है. इसी टोला में उनका और पुटू मुंडा का घर है. टोला में विकास के नाम पर एक सोलर टंकी, पुलिस द्वारा एक डीप बोरिंग किया गया था जो सफल नहीं हुआ है, सिंचाई के लिए डेम का निर्माण किया गया है और कुछ लोगों को आवास योजना का लाभ मिला है. जियान गांव के पुर्णाडीह टोला में सरकार द्वारा विकास का फोकस होना चाहिए था जो की नहीं हुआ है. (नीचे भी पढ़ें)
नक्सल से जुड़े लोगों को हथियार छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का दिया संदेश, कहा बुलेट से नहीं बेलेट से विकास संभव : जेल से रिहा होकर घर लौटे पूर्व नक्सली कान्हु मुंडा ने कहा कि झारखंड के अन्य क्षेत्रों में जो अब भी नक्सली संगठन से जुड़े हुए हैं वे सभी हथियार छोड़कर सरकार की नक्सली पुनर्वास नीति का लाभ लेकर मुख्यधारा से जुड़ने का संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि संगठन में रहकर काफी दुःख तकलीफ को झेला है और घर वापसी पर काफी खुश हैं. उनका भरा-पूरा परिवार है और वे अब परिवार के साथ रहकर परिवार के लिए कुछ करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विकास के लिए वे आगे किसी ना किसी पार्टी से जुड़कर क्षेत्र का विकास करेंगे. क्षेत्र का विकास बुलेट से नहीं बेलेट से संभव है. लोग भी देख चुके हैं 17 सालों में क्या हुआ है. विकास का काम बुलेट से नहीं बल्कि बेलेट से ही संभव है. उन्होंने लोगों से अपील किया की कभी भी ऐसी संगठन से ना जुड़े सरकार की व्यवस्था पर भरोसा रखें और मतदान कर बेहतर जनप्रतिनिधि का चुनाव करें तभी क्षेत्र का विकास होगा. उन्होंने कहा कि उनके संगठन में जाने के पश्चात पत्नी ने काफी संघर्ष कर बच्चों का लालन पालन किया और शिक्षित किया है और अब उनकी बारी है परिवार के लिए कुछ करने की.




