
जमशेदपुर : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अपने आदेश के एक साल बाद भी पर्यावरण मंजूरी के बिना कराये गये सभी निर्माणों के मुआवजे के आकलन पर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने के लिए झारखंड सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाई है. न्यायमूर्ति बी अमित स्टालेखर की अध्यक्षता वाली एनजीटी पूर्वी जोनल पीठ ने अपने आदेश में सरकार और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण को 9 सितंबर को अपने निर्देश के छह महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने में विफलता के लिए फटकार लगाई. मामले को 21 अक्टूबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है. दिल्ली के पर्यावरण कार्यकर्ता आरके सिंह ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पर्यावरण मंजूरी प्राप्त किए बिना सभी संरचनाओं के लिए पर्यावरणीय मुआवजे का आकलन करे और तीन महीने के भीतर परियोजना के प्रस्तावकों से लागत वसूल करे और इस तरह की मंजूरी के बिना सभी चल रहे निर्माण को तुरंत रोक दे. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि विभिन्न प्रमुख निर्माण विशेष रूप से राजधानी रांची, जमशेदपुर, बोकारो और देवघर में अनिवार्य पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त किए बिना निर्माण करा दिये गये है. केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 में कहा गया है कि 20,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र वाली संरचनाओं को पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता है. आदेश में यह भी उल्लेख किया गया था कि झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई स्थिति रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य में 35 प्रमुख संरचनाएं ( रांची में झारखंड उच्च न्यायालय का नया भवन, झारखंड विधानसभा का नया भवन, जमशेदपुर का पीएंडएम हाई-टेक सिटी सेंटर मॉल, जमशेदपुर का ही विजया गार्डन होम्स और आस्था ट्विन सिटी समेत अन्य) बिना पर्यावरण मंजूरी के निर्माण किया गया है. राज्य सरकार शहरी विकास विभाग के माध्यम से यह सुनिश्चित करेगी कि पर्यावरण प्रभाव आकलन उन सभी संरचनाओं के संबंध में किया जाता है जो नगरपालिका क्षेत्रों में ईआईए अधिसूचना, 2006 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तेजी से बनाए गए हैं. पीठ ने आगे कहा था कि ईसी (इनवायरमेंट क्लियरेंस) के बिना ऐसी सभी संरचनाओं के लिए पर्यावरण मुआवजे का आकलन किया जाएगा और इससे तीन महीने के भीतर व्यक्तियों, बिल्डरों, परियोजना समर्थकों से वसूल किया जाएगा. इनका पहले ही आकलन किया जा चुका है, उनके संबंध में भी इसी अवधि के भीतर मुआवजा वसूल किया जाएगा. ईसी के बिना किए जा रहे सभी निर्माणों को पर्यावरण मंजूरी मिलने तक तत्काल रोक दिया जाएगा. पीठ ने पिछले साल जेएसपीसीबी को उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 19 के तहत कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था. आदेश में कहा गया था कि चूंकि उल्लंघन संबंधित अधिकारियों की निगाह में किया जा रहा था, इसलिए संबंधित अधिकारियों, नगर आयुक्तों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ जल्द से जल्द अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया.




