रांची : झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शराब दुकानों के संचालन और प्रबंधन के लिए मैनपावर सप्लाइ करने वाली एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट करने की मांग की है. उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि धनबाद के चिरकुंडा के रहने वाले शिकायतकर्त्ता अमन कुमार सिंह से प्राप्त आवेदन एवं साक्ष्य के रूप में बैंक द्वारा जेएसबीसीएल को फर्जी बैंक गारण्टी के बारे में लिखे गए पत्र की प्रति भेजी गयी है. झारखण्ड राज्य बिवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) द्वारा वर्ष 2022 से झारखण्ड में शराब दुकान संचालित किया जा रहा है जिसमें 7 प्लेसमेन्ट एजेंसियां राज्य के विभिन्न जिलों में शराब दुकानों के संचालन एवं प्रबन्धन हेतु लगभग 4500 मानव बल प्रदान कर रही है. जेएसबीसीएल द्वारा वर्ष 2022 में राज्य के अन्तर्गत दुकानों के संचालन एवं प्रबन्ध हेतु मानव बल की आपूर्त्ति हेतु निविदा निकालकर विभिन्न 7 एजेन्सियों का चयन किया गया, लेकिन सबसे आश्चर्य की बात यह है कि दो प्लेसमेन्ट एजेंसियां मार्सन इनोवेटिव सिक्यूरिटी प्राइवेट लिमिटेड और विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विस व कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड, जिन्हें क्रमशः हजारीबाग एवं धनबाद जिला में मानव बल (मैनावर) आपूर्त्ति हेतु चयन किया गया. (नीचे भी पढ़ें)
इसने एग्रीमेट करते समय जेएसबीसीएल फर्जी बैंक गारंटी जमाकर कार्यादेश प्राप्त कर लिया. बाद में इस सम्बन्ध में जब किसी को जानकारी मिली तो इन्होंने विभागीय सचिव को इस फर्जीवाड़े के बारे में बताया, लेकिन एजेंसियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. शिकायतकर्त्ता ने जो साक्ष्य उपलब्ध कराया है उसमें पंजाब एवं सिंध बैंक, गीता कॉलोनी शाखा, नई दिल्ली द्वारा जेएसबीसीएल को 31 जनवरी 2024 को पत्र लिखकर सूचित किया है कि विजन हॉस्पिटैलिटी व कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जमा बैंक गारंटी फर्जी है. इसी तरह बंधन बैंक कोलकाता द्वारा जेएसबीसीएल को 02 मार्च, 2024 को पत्र लिखकर सूचित किया गया कि मार्सन इनोवेटिव सिक्यूरिटी प्राइवेट लिमिटेड, जिसे हजारीबाग जिला में मैनपावर सप्लाइ का कार्य मिला है, इसका बीजी फर्जी है. लेकिन जेएसबीसीएल द्वारा न ही इसकी जांच कराई गई और न ही कोई कार्रवाई की गई. अधिकारियों द्वारा लीपापोती कर एजेंसियों को काम करने दिया गया. नियमतः इतने बड़े किए गए फर्जीवाड़े की जांच कराकर आरोपित एजेंसियों को काली सूची में डालना चाहिए था और और एफआइआर करना चाहिए था. (नीचे भी पढ़ें)
बैंक द्वारा लिखित सूचना दिए जाने के बावजूद जेएसबीसीएल के जिम्मेवार अधिकारियों एवं विभागीय सचिव ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया और इन दो आरोपित एजेंसियों पर मेहरबानी दिखाते रहे. यह आर्थिक अपराध का एक बड़ा उदाहरण है। बैंक द्वारा एक वर्ष से अधिक समय पूर्व ही जेएसबीसीएल सूचित करने के बावजूद अधिकारियों द्वारा एजेंसियों पर कोई कार्रवाई नहीं किया गया, इसका मतलब है कि जेएसबीसीएल के अधिकारी भी इस भ्रष्ट खेल में शामिल है. इसके लिए दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए निलंबित करना चाहिए. बाबूलाल मरांडी ने बताया है कि इतना ही नहीं, इन दो एजेंसियों द्वारा दुकान में बिक्री का लगभग 25 करोड़ रूपये से अधिक की राशि जेएसबीसीएल में जमा नहीं कराया गया, जैसा कि अखबारों में भी प्रकाशित हुआ है और जेएसबीसीएल ने भी इसे स्वीकार किया है. इन सब आरोपों की पुष्टि के बावजूद इन दो एजेंसियों पर न ही एफआइआर किया गया और न ही काली सूची में डाला गया. इसके लिए विभाग भी जिम्मेवार है. बाबूलाल मरांडी ने मांग की है कि राज्य के राजस्व में नुकसान पहुंचा रहे एवं फर्जी बैंक गारंटी जमा कर कार्यरत उपरोक्त वर्णित दो एजेंसियों पर लगे गंभीर आरोपों की जांच कराते हुए एफआइआर करने एवं इसे ब्लैकलिस्ट करने हेतु निर्देश देंगे. साथ ही जिम्मेवार पदाधिकारियों को निलंबित करेंगे ताकि ऐसी वित्तीय अनियमितता पर रोक लग सके.



