
रांचीः झारखंड में ग्राम पंचायतों की मौजूद व्यवस्था को छह महीने का और विस्तार कर दिया गया है. आज राज्यपाल रमेश बैस ने इससे जुड़े हुए आध्यादेश की मंजूरी दे दी है. झारखंज राज्य में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, कोविड के कारण सरकार चुनाव कराना नहीं चाह रही है, साथ ही कुछ पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन करना बाकी है. इसके अलावा रिजर्व सीट पर समीक्षा की जाएगी कि किन पंचायतों मे मुखिया महिला रिजर्व रहे या फिर आबादी के आधार पर पुरुष के लिए रिजर्व रखा जा सकता है. साथ ही पंचायत चुनाव में बहुत बड़ी राशि खर्च होता है इसलिए संबंधित मंत्री का कहना है कि सरकार के पास फंड का भी अभाव है. इन सभी कारणों को लेकर ग्रामीण विकास मंत्री का कहना है कि पंचायत चुनाव दिसंबर तक नही कराया जा सकता है. जिसके बाद राज्यपाल ने पंचायत प्रतिनिधियों को छह महीने के सेवा विस्तार आध्यादेश को मंजूरी दी है.पंचायत चुनाव होने तक सेवा विस्तार दिया है. शिड्यूल एरिया में मुखिया रिजर्व सीट पर किसी तक का संशोधन नहीं होने की संभावना है लेकिन गैर शिड्यूल एरिया में ऐसी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.राज्य निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर तक पंचायत चुनाव कराने पर अपनी सहमति दी है. इसको देखते हुए संशोधन प्रस्ताव दिया गया था. आध्यादेश मिलने के साथ ही राज्य में गैर दलीय आधार पर पंचायत चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया. इसके साथ ही नगर निगम क्षेत्र में मेयर, डिप्टी मेयर, पर्षद, नगर पंचायत क्षेत्र में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव भी गैर दलीय आधार पर होंगे. सरकार ने बड़ी ही चालाकी से इस आध्यादेश को लाया है. भाजपा का शहरी इलाके में दबदबा है अब पार्टी आधार पर चुनाव होते है तो भाजपा को फायदा होगा. इसको रोकने के लिए सरकार ने यह फैसला किया है. विदित हो कि राज्य में पंचायतों को दिए गये पहले एक्सटेंशन का समय सात जुलाई को समाप्त हो रहा था. कोराना के कारण चुनाव संभव नहीं है,इस स्थिति में राज्य सरकार ने फिर से एक्सटेंश्न देने के लिए अध्यादेश लाया. अगामी मानसून सत्र में इसे विधेयक का रूप देकर नियमों में संशोधन करने की तैयारी है. वर्तमान नियम में सरकार सिर्फ एक बार ही पंचायतों को अवधि विस्तार दे सकती है. ऐसे में दोबारा एक्सटेंशन देने के लिए नियमों में बदलाव करना होगा. राज्य में पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर 2020 में ही समाप्त हो गया था. उस वक्त सरकार ने छह माह अवधि विस्तार दिया और ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति गठित की, जिसमें पंचायत सचिव सहित अधिकारी भी रखे गये थे.





