
रांची/जमशेदपुर : झारखंड की पूर्ववर्ती रघुवर दास की सरकार द्वारा फोन टेपिंग व जासूसी कराती थी. इस काम में एडीजी रैंक के एक ऑफिसर के निर्देश पर एके निजी व्यक्ति के दफ्तर में दो इंस्पेक्टर और 12 पुलिसकर्मी राजधानी रांची में काम करते थे और सब पर नजर रखते और रखवाते थे. यह खुलासा हुआ है सीआइडी की जांच में. सीआइडी की जांच रिपोर्ट झारखंड के पुलिस महानिदेशक एमवी राव को भेज दी गयी है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रघुवर दास की सरकार में फोन टेपिंग व जासूसी का काम सरकार के स्तर पर ही होती थी, जिसके लिए बकायता रांची के गोंदा थाना में अवैध तरीके से दफ्तर संचालित किया जाता था और विशेष शाखा की पूरी लगी रहती थी. सूत्रों के अनुसार, सीआइडी की ओर से सौंपी गयी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि करीब 400 लोगों की जासूसी और फोन टेपिंग झारखंड की रघुवर दास की सरकार कराती थी. सूत्र बता रहे है कि जिन 400 लोगों की जासूसी या फोन टेपिंग होती थी, उसमें केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व मंत्री सरयू राय, भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले समेत झारखंड की राजधानी रांची और जमशेदपुर के कई पत्रकारों के भी फोन थे. इन लोगों की सारी गतिविधियों पर विशेष शाखा द्वारा नजर रखी जाती थी. हालांकि, झारखंड पुलिस द्वारा अब तक इस जांच रिपोर्ट का खुलासा या सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सरकार के सूत्र बता रहे है कि सीआइडी ने अपनी रिपोर्ट में 400 लोगों के नाम का खुलासा जरूर कर दिया है. आपको बता दें कि राज्य के डीजीपी एमवी राव को पूर्व मंत्री सरयू राय ने एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने यह कहा था कि उनकी जासूसी करायी जाती थी और उसको लेकर एक दफ्तर तक अवैध तरीके से रांची में चलाया जाता था. इसके अलावा फोन टेपिंग भी की जाती थी. सरयू राय ने यह भी आरोप लगाया गया था कि पूर्व डीजीपी और पूर्व मुख्यमंत्री की जानकारी में यह सारा कुछ हो रहा था, जिस कारण इस मामले की एसआइटी जांच करायी जानी चाहिए. इसके आधार पर जांच करायी गयी, जिसमें सीआइडी ने साफ तौर पर जानकारी दी है कि पूर्व मंत्री सरयू राय का आरोप सही है और सरयू राय के अलावा केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, उनके नजदीकी माने जाने वाले भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले समेत 400 लोगों की जासूसी करायी जाती थी और इसमें कई सारे पत्रकार भी शामिल थे. 400 लोगों की जासूसी सिर्फ छह माह में ही कराया गया था. हालांकि, पूरे तौर पर न तो झारखंड सरकार और न ही झारखंड पुलिस द्वारा कोई अधिकारिक ही जानकारी दी गयी है. बताया जाता है कि इस रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि सीआइडी के नये एडीजी बनने के बाद जमशेदपुर के पूर्व एसपी रह चुके अनिल पाल्टा ने इस कार्यालय को सबसे पहले बंद कराया था और फिर अवैध तरीके से हो रही फोन टेपिंग को बंद कराया था और सभी पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई करते हुए हटवाया था. वैसे इस पूरे मामले पर अधिकारिक बयान आना बाकि है और अब नये सिरे से यह मामला गरमाता नजर आ रहा है.






