जमशेदपुर: जमशेदपुर में मानगो पुल जाम रहने के कारण एम्बुलेंस में डिलवरी होने के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है. मानवाधिकार कार्यकर्त्ता मनोज मिश्रा की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने केस संख्या 681/34/6/2025 दर्ज किया है तथा इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर उच्च स्तरीय जांच कराने का निर्णय लिया है. उक्त जानकारी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्यालय से शिकायत कर्ता मनोज मिश्रा को मेल के माध्यम से भेजी गयी है. जमशेदपुर की बदहाल ट्रैफ़िक पुलिस की शर्मसार करने वाली इस घटना ने समस्त शहर वासियो को मर्माहत कर दिया था, ज़ब से मानगो मे फ़्लाई ओवर बनाने का कार्य आरम्भ हुआ है तब से जिला प्रशासन ने मानगो की जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है. पुल के पास से बस स्टैंड हटाने की कार्यवाही भी अबतक अधर में लटकी पड़ी है. (नीचे भी पढ़ें)
21 मई 2025 को 24 वर्षीय माला रानी भगत के साथ दिल दहला देने वाली घटना घटी थी. वह प्रसव पीड़ा से तड़पती हुई डुमरिया से एमजीएम अस्पताल एंबुलेंस में जा रही थी. उस दिन मानगो ब्रिज पर रात करीब 8 बजे से 11 बजे तक भयावह जाम की स्थिति थी. माला रानी भगत ने तड़पते हुए भयंकर प्रसव पीड़ा को सहते हुए एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया. यह स्थिति मां और बच्चे दोनों के लिए घातक और जानलेवा हो सकती थी. मानगो में अभी फ्लाईओवर का निर्माण चल रहा है, जिसके कारण पिछले एक साल से मानगो पुल मे लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है. स्कूल के बच्चों सहित महिलाओ और बुजुर्गो को इस जाम के कारण भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. मानवाधिकार आयोग ने जाम के दौरान डिलवरी होने के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है.



