ओस्लो: नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार भारतवंशी नावनेथम ‘नावी’पिल्लै को देने का ऐलान किया है. उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा.नोबेल के बाकी पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, लेकिन शांति का नोबेल नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में दिया जाता है. इसकी वजह करीब 130 साल पुरानी है. यह व्यवस्था खुद अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में तय की थी.1895 में लिखी अपनी वसीयत में नोबेल ने तय किया था कि शांति पुरस्कार का फैसला नॉर्वे की संसद द्वारा चुनी गई समिति करेगी.(नीचे भी पढ़े)
उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक ही राजा के अधीन थे, हालांकि दोनों की अपनी संसद और अलग राजनीतिक व्यवस्था थी. नोबेल ने यह नहीं बताया था कि शांति पुरस्कार के लिए उन्होंने नॉर्वे को ही क्यों चुना.नोबेल की 1896 में मौत हुई और 1901 से पुरस्कार दिए जाने लगे. उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक संघ में थे.1905 में दोनों देश अलग हो गए, लेकिन नोबेल की वसीयत में शांति पुरस्कार के लिए नॉर्वे को दी गई जिम्मेदारी जारी रही. इसी वजह से आज भी फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, साहित्य और अर्थशास्त्र के नोबेल स्वीडन में, जबकि शांति का नोबेल नॉर्वे में दिया जाता है.







