
जमशेदपुर : टाटा संस के एमिरट्स चेयरमैन रतन टाटा 83 साल की उम्र में है. इस उम्र में काफी साल के बाद वे जमशेदपुर आये. वे दो दिनों तक पूरे जमशेदपुर का भ्रमण किया और टाटा समूह के कार्यों को देखा. लेकिन एक वक्त ऐसा आया, जब उनके एक वाक्य ने वहां उनके साथ मौजूद टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह को भी भावुक कर दिया. दरअसल, टाटा स्टील के जेनरल ऑफिस में रतन टाटा और एन चंद्रशेखरन मौजूद थे. यूनियन के टॉप थ्री और टाटा स्टील के एमडी भी मौजूद थे. इसी बीच उनकी बातचीत हो रही थी कि रतन टाटा ने कहा कि इस बार तो वे आ गये है, मालूम नहीं अब कब मुलाकात होगी. इस वाक्य के बाद सारे लोग भावुक हो गये. कुछ देर के लिए खुद रतन टाटा भी भावुक हो गये थे. फिर उन्होंने अन्यान्य बातें की और फिर यूनियन के पदाधिकारियों ने रतन टाटा को यूनियन आने का न्योता दिया. इस न्योता को रतन टाटा ने स्वीकार भी किया. हालांकि, उनकी यह बातें सबको दिल को छू गयी. वैसे वे लगातार सक्रिय रहे. रतन टाटा और एन चंद्रशेखरन ने यूनियन के लोगो से मुलाकात के पहले टाटा स्टील द्वारा संचालित टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) के पूर्व जीएम डॉ राजन चौधरी और वर्तमान जीएम डॉ सुधीर राय से मुलाकात की. इस दौरान कोरोना को लेकर टीएमएच द्वारा किये गये कार्यों की सराहना रतन टाटा और एन चंद्रशेखरन ने किया. इसके अलावा 3 मार्च को ही पिछले वर्षों की तरह, जमशेदपुर वर्क्स के अंदर स्टीलेनियम हॉल में एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई. इस प्रदर्शनी को भी रतन टाटा और एन चंद्रशेखरन ने देखा. इस वर्ष की प्रदर्शनी “एक्सीलेरेटिंग टू द फ्यूचर : लर्निंग फ्रॉम द पैनडेमिक ऐंड पायोनियरिंग अ न्यू ऑपरेटिंग पाराडाइम’’ (भविष्य के लिए त्वरणशील : महामारी से सीखना और एक नए परिचालन प्रतिमान का नेतृत्व करना) विषय पर आधारित थी. टाटा स्टील के विभिन्न विभागों और डिवीजनों द्वारा टाटा स्टील की यात्रा के उल्लेखनीय उदाहरणों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें कंपनी को एक नए परिचालन प्रतिमान के लिए सक्षम बनाने वाले टेक्नोलॉजी लीडरशिप और संगठनात्मक एजीलिटी के विभिन्न पहलु आदि शामिल थे. महामारी को देखते हुए जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेल गतिविधियों को “नो कॉन्टैक्ट“ स्पोर्ट्स जैसे रनिंग, लॉन्ग जंप और रेस वॉक तक सीमित रखा गया. इस वर्ष के संस्थापक दिवस का विषय ‘एजाइल टुडे फॉर अ सस्टेनेबल टुमौरो’ है. टाटा स्टील समेत सभी सफल प्रतिष्ठानों ने कार्यस्थल संस्कृति और पर्यावरण में ‘एजीलिटी’ की महती आवश्यकता को अंगीकार किया है. ‘एजीलिटी’ हमेशा सबसे पहली पंक्ति में रही है और बदलाव को धारण करने और इसे प्रभावी करने के लिए यह लीडरों के साथ.साथ कर्मचारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण गुण-धर्म है. टाटा स्टील ने एक इकोसिस्टम बनाया है, जो कर्मचारियों और स्टेकहोल्डरों को नए क्षितिज का पता लगाने में सक्षम बनाता है और नवाचार व उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए विफलताओं से सिखाता है. इन प्रयासों ने समय के साथ टाटा स्टील जैसे संस्थानों को टिकाऊ बनने में सक्षम बनाया है.
इसके अलावा इन लोगों ने टाटा मोटर्स का भी दौरा किया. संस्थापक दिवस के मौके पर टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट के हेड विशाल बादशाह ने रतन टाटा और एन चंद्रशेखरन का स्वागत किया. इस दौरान इन लोगों ने टाटा मोटर्स के कारोबार को भी देखा और जाना कि क्या स्थिति है.



