जमशेदपुर/मुंबई : टाटा समूह के पूर्व चेयरमैम रतन टाटा की वसीयत में परिवार के बाहर से सिर्फ एक व्यक्ति का नाम शामिल था, जो जमशेदपुर के बारीडीह के रहने वाले मोहिनी मोहन मोहन दत्ता शामिल है. मोहिनी मोहन दत्ता ताज होटल्स समूह के निदेशक भी रह चुके है. मोहिनी मोहन दत्ता ने पिछले दिनों टाटा की बची हुई संपत्ति के आकलन पर सवाल उठाते हुए अपने हिस्से पर असंतुष्टि जतायी थी. उनका कहना था कि उनके नाम पर लिखी हुई संपत्ति का वैल्यू और अधिक है. लेकिन अब उन्होंने इसको स्वीकार कर लिया है.(नीचे भी पढ़े)
उनके इस मंजूरी से वसीयत के एक्जीक्यूटर्स (अमल में लाने वाले) को बांबे हाईकोर्ट से प्रोबेट यानी वसीयत को कानूनी मान्यता प्राप्त करने में आसानी होगी और तेजी भी आयेगी. आपको बता दें कि स्वर्गीय रतन टाटा ने अपनी 3900 करोड़ रुपये की संपत्ति करीब दो दर्जन लोगों में बांटी थी, जिसमें से केवल 77 वर्षीय मोहिन मोहिनी मोहन दत्ता टाटा के घराने से बाहर के व्यक्ति है, जिन्होंने उनकी संपत्ति के वैल्यूएशन पर सवाल उठाये थे. इसके अलावा रतन टाटा ने अपनी संपत्ति यानी रेसिड्यूल एस्टेट का बाकि दो तिहाई हिस्सा उनकी सौतेली बहन 72 वर्षीय शिरीन जेजेभोय और 70 वर्षीय डीना जेजेभो को दिया है. वे दोनों ही वसीयत को अमल में लाने वाले एक्जीक्यूटर्स में शामिल है. इसके अलावा अपने बड़े भाई जिमी नवल टाटा, उनके एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट शांतनु नायडू, उनके कुत्ते समेत कुल 24 लोगों के नाम अपनी वसीयत दी है. (नीचे भी पढ़े)
बताया जाता है कि मोहिनी मोहन दत्ता ने उनको मिले हिस्से के आकलन पर असहमति जतायी थी, लेकिन वसीयत में नो कांटेस्ट क्लाउज जोड़ा गया है, जिसमें साफ तौर पर लिखा गया है कि इसको चुनौती नहीं दी जा सकती है. वसीयत में नियम है कि जो भी लाभार्थी होगा, अगर वह वसीयत पर विवाद करेगा तो वह अपने सभी अधिकार खो देगा. इसके बाद ही मोहिनी मोहन दत्ता ने अपनी सहमति प्रदान कर दी है. रतन टाटा की वसीयत में जिस रेसिड्यूल एस्टेट का जिक्र किया गया है, उसमें बैंक डिपोजिट, फॉरेन करेंसी नोट और कीमती क्रिस्टल और आर्टिपैक्ट शामिल है. इसकी कीमत करीब 1764 करोड़ रुपये बतायी जाती है और इसका एक तिहायी हिस्सा यानी 588 करोड़ रुपये मोहिनी मोहन दत्ता को दिया जायेगा. इसके अलावा मोहिनी मोहन दत्ता के पास टाटा कैपिटल के एक लाख से अधिक के शेयर है, जिनका वैल्यू करीब 10 करोड़ रुपये है. मोहिनी मोहतन दत्ता को वसीयत के तहत मिलने वाली 588 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कोई टैक्स भी नहीं देना होगा क्योंकि भारतीय कानून के तहत इस तरह से मिलने वाली संपत्ति की टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है.(नीचे भी पढ़े)
जमशेदपुर में रतन टाटा से हुई मुलाकात के बाद बदल गयी मोहिनी मोहन दत्ता की किस्मत
मोहिनी मोहन दत्ता की रतन टाटा से झारखंड के जमशेदपुर में मुलाकात हुई थी. तब रतन टाटा 25 साल के छे और मोहिनी मोहन दत्ता 13 साल के छे. श्री टाटा ने श्री दत्ता को मंुबई बुलाया और उनकी फंडिंग से एक ट्रैवल एजेंसी खुलवा दी. बाद में इस एजेंसी का विलय टाटा कैपिटल्स में हो गया और ताज ग्रुप का कामकाज भी यहीं एजेंसी को दे दिया गया. वर्ष 2019 तक श्री दत्ता इस ताज ग्रुप के डायरेक्टर के पद पर रहे और बाद में इस एजेंसी को थामक कुक को बेच दिया गया. मोहिनी मोहन दत्ता की बेटी भी ताज ग्रुप में ही काम करती थी. रतन टाटा के साथ मोहिनी मोहन दत्ता की दोस्ती जग जाहिर नहीं थी, लेकिन अचानक से उनके नाम से संपत्ति लिखे जाने की जानकारी आने के बाद सनसनी फेल गयी. मोहिनी मोहन दत्ता जमशेदपुर के बारीडीह के रहने वाले थे. वे टेल्को के जीटी हॉस्टल में पहली बार रतन टाटा से मिले थे और तब से लेकर अंतिम समय तक जुड़े रहे थे. जमशेदपुर छोड़कर बाद में मोहिनी मोहन दत्ता मुंबई चले गये और टाटा के कोलाबा स्थित बख्तावर निवास में रहने लगे. मोहिनी मोहन दत्ता ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि रतन टाटा ने उनकी बहुत मदद की और उनके जीवन में उनको आगे बढ़ाया. वे दोनों का करीब 60 साल से संपर्क था.











