मुंबई : टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा की लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों हिस्सेदारी रतन टाटा के दो फाउंडेशन रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन और रतन टाटा एंडोमेंट ट्रस्ट को दिया जायेगा. बांबे हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए ह अहम फैसला सुनाया है. इन कंपनियों की हिस्सेदारी पहले रतन टाटा की सौतेली बहनों और रतन टाटा के दोस्त बताने वाले जमशेदपुर के बिरसानगर निवासी मोहिनी मोहन दत्ता को दिये जाने की अटकले लगायी जा रही थी, लेकिन जब टाटा की संपत्ति के प्रशासकों ने बांबे हाईकोर्ट से पूछा कि दिवंगत उद्योगपति का इक्विटी पोर्टफोलियो किसे मिलेगा. बांबे हाईकोर्ट ने इसको लेकर एक आदेश दिया है, जिसके तहत टाटा की वसीयत के प्रोबेट का रास्ता खुल गया है. प्रोबेट कानूनी प्रक्रिया है. यह प्रक्रिया एक माह में पूरी होने की उम्मीद है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रशासको के बीच कोई विवाद नहीं था. लेकिन उनमें से कुछ लाभार्थी भी है. रतन टाटा की संपत्ति के अन्य उत्तराधिकारियों ने कुछ सवाल उठाये थे. (नीचे भी पढ़ें)
ये सवाल टाटा की वसीयत पर चौथे और अंतिम परिशिष्ट के प्रभाव से जुड़े थे, जिस कारण इन सवालों का हल करने के लिए ओरिजिनेटिंग समन्स दायर किये गये थे. मुख्य सवाल यह था कि क्या टाटा के शेयर पोर्टफोलियो को उनकी वसीयत के खंड 4 से 8 के अनुसार उनकी सौतेली बहनों शिरीन और डीना जेजेभोय और दत्ता को दिया जाएगा या फिर क्या यह उनकी अवशिष्ट (बची हुई) संपत्ति का हिस्सा होगा और उनकी दो फाउंडेशन रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन और रतन टाटा एंडोमेंट ट्रस्ट को जाएगा. वसीयत के खंड 13 में यह बात लिखी है, जिसे चौथे परिशिष्ट में बदल दिया गया था. जेजेभोय बहनें टाटा की संपत्ति की प्रशासक और लाभार्थी दोनों हैं. आदेश में कहा गया कि एक वसीयतकर्ता परिशिष्टों के माध्यम से अपनी वसीयत में बदलाव कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों में यह तय हो चुका है कि परिशिष्ट वसीयत से ऊपर होगा इसलिए, टाटा की वसीयत को परिशिष्टों में किए गए बदलावों के साथ ही माना जाएगा. जस्टिस मनीष पिटाले ने कहा कि लिस्टेड और अनलिस्टेड शेयरों में टाटा की जो हिस्सेदारी है, और जो उनकी वसीयत में खास तौर पर शामिल नहीं है, वह उनकी अवशिष्ट संपत्ति का हिस्सा है. यह संपत्ति उनकी दोनों फाउंडेशन को बराबर हिस्सों में दी जाएगी.











