सरायकेला : सरायकेला राणी सती मंदिर मार्ग स्थित नव निर्मित श्री राणी सती मंदिर, सरायकेला में रविवार को श्री राणी सती दादी की विधि-विधान पूर्वक प्राण प्रतिष्ठा हो गई. इसके साथ ही मंदिर में विगत छह दिनों से श्री राणी सती दादी की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर चल रहा यज्ञानुष्ठान एवं प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हो गया. (नीचे भी पढ़ें)

इससे पूर्व राणी सती दादी की प्राण प्रतिष्ठा के तहत नेत्रोन्मीलन एवं नामकरण की प्रक्रिया पूरी की गई एवं दादी जी की भोग-आरती एवं पूर्णाहुति हुई , जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष शामिल हुए. (नीचे भी पढ़ें)

एवं उसके पश्चात पूर्णाहुति की गई. उधर, इस अवसर पर कोलकाता से आईं स्वाती अग्रवाल के कर्णप्रिय भजनों ने उपस्थित श्रद्धालु भक्तों को खूब झुमाया. पूर्णाहुति के पश्चात मंदिर परिसर में प्रसाद वितरण आरंभ हुआ. (नीचे भी पढ़ें)
बताते चलें कि सरायकेला के राणी सती मंदिर रोड में समाज के सहयोग से भव्य श्री राणी सती मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसमें श्री राणी सती दादी की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई है. इस अवसर पर विगत 28 जनवरी से ही प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा था. (नीचे भी पढ़ें)
प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ के आज अंतिम दिन, रविवार को प्रातः 8:11 बजे देव पूजन के साथ आज के यज्ञानुष्ठआन की शुरुआत हुई एवं पूरे विधि-विधान के साथ एवं दिव्य मंत्रोच्चार के बीच राणी सती दादी की प्राण प्रतिष्ठा की गई.(नीचे भी पढ़ें)
राणी सती दादी जी की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व विधि-विधान के साथ महान्यास एवं नेत्रोन्मीलन की प्रक्रिया पूरी की गई. प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात नामकरण संस्कार एवं पूर्णाहुति के पश्चात दादी जी की भोग आरती हुई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत की. इसके साथ ही मंदिर में दादी जी की प्राण प्रतिष्ठा के लिए आयोजित यज्ञानुष्ठान संपन्न हो गया. इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महा प्रसाद का वितरण आरंभ हुआ. जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. (नीचे भी पढ़ें)
उधर दूसरी तरफ कोलकाता से पधारीं मशहूर गायिका स्वाती अग्रवाल का मंगल पाठ आरंभ हुआ, मधुरकंठी स्वाती अग्रवाल के मंगल पाठ एवं भजनों की प्रस्तुति में उपस्थित श्रद्धालु, विशेष कर महिलाएं झूमती-नाचतीं नजर आईं. दोपहर सवा दो बजे के करीब आरंभ स्वाती अग्रवाल के मंगल पाठ में श्रद्धालु, विशेष रूप से महिलाएं शाम तक थिरकती, नाचती एवं साथ में गीत गाती नजर आईं. इस यज्ञानुष्ठान के दौरान बाहर से पधारे श्रद्धालुओं के लिए आयोजन समिति की ओर से ठहरने की भी व्यापक व्यवस्था की गई थी.



