
वाराणसीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र लगातार अपनी सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने और अपने नए रंग-रूप को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. करीब 352 वर्ष बाद वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम नया रूप दुनिया के सामने आया है. पीएम मोदी 13 दिसंबर को जनता को समर्पित किया. उन्होंने करीब 50 मिनट का संबोधन भी दिया. इस कारिडोर को बनाने वाले श्रमिकों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने 35 माह में इसको पूरा किया. इस दौरान उन्होंने पूर्व की सरकारों और इतिहास की गर्त में समा चुके आतताइयों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि काशी में यहां के कोतवाल की इजाजत के बिना कुछ नहीं हो सकता है. कोई बड़ा होगा तो वो अपने घर का होगा. (नीचे भी पढ़े)
यहां पर बाबा विश्वनाथ की इजाजत के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है. आतातायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए, इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए. औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है. जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की. (नीचे भी पढ़े)
लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है.पीएम ने कहा कि कोई कितना बड़ा हो, अपने घर को होगा, काशी में बाबा की इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता. इसमें बाबा के योगदान के अलावा गणों का योगदान लगा है. कोरोना के दिनों में भी यहां का काम नहीं रुका. काशी को लेकर एक गलत धारणा बनाई गई थी. कहा जाता था कि कैसे होगा. वो केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाते थे, मजाक बनाते थे. पीएम मोदी शाम को गंगा घाट की आरती में भी शामिल होंगे. (नीचे भी पढ़े)
यूपी को आज मिलने वाली सौगात के गवाह देश के 150 से अधिक धर्माचार्य, संत-महंत व प्रबुद्धजन बने. इसके अलावा इसमें आम आदमी और दूसरे नेता भी जुड़े. भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी इसमें शामिल हुए. इस पल का सभी को इंतजार था. ये करीब 5,27,730 वर्ग फीट में फैला है. जन आस्था के शीर्ष केंद्र के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम से पूरे देश को जोड़ने के लिए 51,000 स्थानों पर एलईडी स्क्रीन तैयार की गई. (नीचे भी पढ़े)
जीर्णोद्वार में लगे मजदूरों के साथ पीएम ने किया दोपहर का भोजन

देश के कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसी भी बड़े आयोजन के बाद उसके निर्माण तथा जीर्णोद्धार में लगे कर्मकार तथा कर्म साधकों का सम्मान तथा स्वागत करना नहीं भूलते हैं. श्री मोदी ने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में सोमवार को बड़े सम्मान के बाद जीर्णोद्धार में लगे श्रमजीवियों के साथ भोजन भी किया. इससे पहले प्रयागराज के कुंभ के बाद उन्होंने सफाई के काम में लगे कर्मियों का पांव धुलने के साथ उनको सम्मानित भी किया था.(नीचे भी पढ़े)
प्रधनमंत्री मोदी ने सोमवार को पूजा-अर्चना के बाद श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के चौक में इस पावन धाम के निर्माण में लगे श्रमिकों तथा कामगारों पर पुष्प वर्षा की. उन्होंने समाज में काफी नीचे रहने वाले लोगों को अपने पास बैठाने के साथ उन पर पुष्प वर्षा भी की. इतना ही नहीं पीएम ने इनके साथ दोपहर में भोजन भी किया. प्रधानमंत्री के इस आचरण से ऊंची-नीच और छोटे-बड़े वर्ग के बीच खाई भी पटती नजर आई. (नीचे भी पढ़े)
प्रधानमंत्री भोजन से पहले सभी कार्मिकों के पास गए और कुछ से को उन्होंने बात भी की. कुछ ने तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई तो प्रधानमंत्री ने मना नहीं किया और ग्रुप फोटो भी कराई. इनमें निर्माण करने वाले श्रमिकों के साथ सफाई कर्मी भी थे. प्रधानमंत्री मोदी ने वहां पर लगी अपनी कुर्सी हटाई और कामगार तथा सफाईकर्मी साथियों के बीच जाकर बैठ गए. इससे संदेश साफ है कि हम सभी सनातनी एक हैं. (नीचे भी पढ़े)
हम लोगों में ना कोई दूरी नहीं है और ना ही कोई भेदभाव.पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज हर उस श्रमिक भाई-बहनों का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिनका पसीना इस भव्य परिसर के निर्माण में बहा है. कोरोना के इस विपरित काल में भी उन्होंने यहां पर काम रुकने नहीं दिया, हमारे कारीगर, हमारे सिविल इंजीनयरिंग से जुड़े लोग, प्रशासन के लोग, वो परिवार जिनके यहां घर थे सभी का मैं अभिनंदन करता हूं.




