जमशेदपुर : टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की ओर से दक्षिण पूर्व रेलवे के इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में आगजनी जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न प्रकार के फायर एक्सटिंग्विशर एवं अग्निशमन उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण आयोजित किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर के सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें दक्षिण पूर्व रेलवे के नव नियुक्त ट्रेनी लोको पायलट, प्रमोशनल लोको पायलट, रिफ्रेशर लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट शामिल हुए. प्रशिक्षण के दौरान सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने आग लगने के पीछे होने वाली रासायनिक अभिक्रिया, आग के विभिन्न वर्गीकरण तथा आग बुझाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ठोस, द्रव, गैस तथा धातु से संबंधित आग में सही प्रकार के अग्निशामक यंत्र का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने विशेष रूप से बताया कि विद्युत उपकरणों, तेल तथा धातु से लगी आग पर पानी आधारित अग्निशामक का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि गलत प्रकार के फायर एक्सटिंग्विशर के इस्तेमाल से स्थिति और गंभीर हो सकती है. प्रशिक्षण के दौरान लोको एवं इंजन की अग्नि सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि वैग 9 विद्युत इंजन में अग्नि सुरक्षा के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) आधारित अग्निशमन व्यवस्था का प्रावधान किया गया है. आग लगने की स्थिति में निर्धारित प्रणाली के माध्यम से अग्निशमन व्यवस्था को सक्रिय कर आग पर नियंत्रण पाने की प्रक्रिया समझाई गई. फायर एक्सटिंग्विशर के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग का मॉक ड्रिल एवं व्यावहारिक प्रदर्शन डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह द्वारा किया गया. इस दौरान प्रतिभागियों को फायर एक्सटिंग्विशर को सही तरीके से पकड़ने, आग की दिशा में उचित दूरी बनाए रखने तथा सुरक्षित तरीके से आग बुझाने की प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया. (नीचे भी पढ़ें)
प्रशिक्षण में आग की चपेट में आने पर स्वयं को बचाने के लिए ‘स्टॉप–ड्रॉप–रोल’ विधि तथा आग से झुलसे व्यक्ति के शरीर पर जलने की गंभीरता का आकलन करने के लिए ‘रूल ऑफ नाइन्स’ की जानकारी भी दी गई. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर, आद्रा, रांची एवं खड़गपुर मंडल से कुल 240 लोको पायलटों ने भाग लिया. प्रशिक्षण का उद्देश्य लोको पायलटों को आगजनी की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने, सही अग्निशमन उपकरण का चयन करने तथा सुरक्षित तरीके से आग पर नियंत्रण पाने के लिए व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाना था.




