
जमशेदपुरः 17 दिसंबर को आदित्यपुर स्थित श्रीनाथ विश्वविद्यालय में पांचवा अंतरराष्ट्रीय श्रीनाथ हिंदी महोत्सव का शुभारंभ हुआ. सर्वप्रथम अतिथियों का स्वागत चंदन व शंखनाद के साथ किया गया. महोत्सव में मुख्य अतिथि कोल्हान विश्विद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ . गंगाधर पंडा थे. साथ ही वाणिज्य अधिकारी डॉ पी.के. पाणी , अवकाश प्राप्त हिंदी के विभागाध्यक्ष डॉ बीएम पेनाली , तद्भव पत्रिका के सम्पादक अखिलेश जी तथा अवकाश प्राप्त प्रोफेसर डॉ चंद्रकला त्रिपाठी उपस्थित थीं. सर्वप्रथम श्रीनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सुखदेव महतो ने संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हिंदी हमारे संस्कार की भाषा है. यह केवल एक महोत्सव नहीं है इसे हमलोग जीते है और भरपूर जीते है.(नीचे भी पढ़े)

साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी भावनाओं से जुड़ी हुई भाषा है. उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत शॉल , पुष्पगुच्छ तथा स्मृति चिह्न देकर किया. कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गंगाधर पंडा ने कहा कि भारत में जितनी भी भाषाएं बोली जाती है उसमें हिंदी ने सबसे लंबा सफर तय किया है. कोल्हान में कई जनजाति भाषाएं भी बोली जाती है हमें हिंदी के साथ इन्हें भी लेकर चलना है. उन्होंने कहा कि अब तक भारत में जितने भी शिक्षा आयोग बने है सबने हिंदी और मातृ भाषा पर जोर दिया गया है. डॉ पंडा ने कविता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कविता हमे जोड़ती है और इसके लिए उन्होंने बच्चन की कविता मधुशाला की पंक्तियों को गुनगुनाया. (नीचे भी पढ़े)

अखिलश तथा प्रोफेसर चंद्रकला त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी केवल भाषा मात्र नहीं है बल्कि यह हमारे मांस मज्जा में बसी हुई है. उन्होंने कहा कि एक भाषा संस्कृति तभी बनती है जब उसमें साहित्य का निर्माण होता है. उन्होंने कहा कि यथार्थ केवल यथा तथ्य नहीं है बल्कि इसमें बहुत कुछ जुड़ता है. कुछ लोग कल्पना और यथार्थ को अलग मानते है पर यह एक दूसरे से जुड़ी हुई है. प्रोफेसर चन्द्रकला त्रिपाठी ने कहा कि यह आयोजन बहुत भव्य है. (नीचे भी पढ़े)

उन्होंने कहा कि इन दिनों शिक्षा और रोजगार में एक फर्क दिख रहा है जो एक चिंता का विषय है. हिंदी महोत्सव का आयोजन एक बड़ा कदम है. उन्होंने आगे कहा कि इस महोत्सव को देख के ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह जहाज है जो कई महासागरों को पार करेगा. चंद्रकला ने कहा कि आप लोग जो यहां प्रतिभागी बनकर आए है आपके उत्साह की सराहना की जानी चाहिए.
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वे बोली की कई लोगों का मानना है कि हिंदी अन्य भाषाओं का दमन करती है पर ऐसा बिल्कुल नहीं है. हिंदी में सभी भाषाओं का रंग है और यह देशवासियों को एक तार में बांधने का कार्य करती है. (नीचे भी पढ़े)

उन्होंने कहा कि हिंदी कि आयु अधिक नहीं परंतु जिस तरह हिंदी ने खुद को खड़ा किया है वह प्रशंसनीय है. महोत्सव में पहले दिन प्रतियोगिताओं की शुरुआत हास्य कवि सम्मेलन से हुई . हास्य कवि सम्मेलन में मॉरिशस से प्रतिभागी के रूप में भाग्यलक्ष्मी ऑनलाइन जुड़ी थी. इसके साथ ही निबंध, लेखन , दीवार सज्जा , सामूहिक चर्चा , साहित्यिक सफर , व्यक्तित्व झांकी इत्यादि प्रतियोगिताएं साथ में हुई.




