जमशेदपुर : टाटा स्टील की वार्षिक आमसभा (एजीएम) गुरुवार को सम्पन्न हुआ. इस दौरान कंपनी के विकास का रोड मैप टाटा समूह औऱ टाटा स्टील के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने पेश किया. इस दौरान टाटा स्टील के वाइस चेयरमैन नोएल टाटा, टाटा स्टील के एमडी सह सीइओ टीवी नरेन्द्रन, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टऱ कौशिक चटत्र्जी समेत सारे डायरेक्टर मौजूद थे. चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने अपने सम्बोधन में कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत वैश्विक बाज़ारों में सकारात्मक उम्मीदों के साथ हुई. स्थिर वैश्विक आर्थिक वृद्धि, महंगाई में नरमी और वित्तीय परिस्थितियों में सुधार की उम्मीदों ने इस आशावाद को मजबूत किया. वर्ष के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच कारोबार समझौता तथा भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम कारोबार समझौते जैसे सकारात्मक घटनाक्रम भी सामने आए. हालाँकि, मार्च में पश्चिम एशिया में संकट की शुरुआत के साथ परिस्थितियाँ बदल गईं. इसके परिणामस्वरूप वैश्विक अर्थव्यवस्था पर स्टैगफ्लेशन, उत्पादन में गिरावट और बढ़ती महंगाई का दबाव देखने को मिला. इन चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई और वित्त वर्ष 2026 में 7.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की. (नीचे भी पढ़ें)

इस विकास का प्रमुख आधार मजबूत घरेलू मांग और विनिर्माण क्षेत्र का सशक्त प्रदर्शन रहा. अब यदि वित्त वर्ष 2026 के दौरान वैश्विक इस्पात उद्योग के प्रदर्शन की बात करें, तो यह वर्ष अपेक्षाकृत धीमा रहा. चीन की आर्थिक सुस्ती, पश्चिमी देशों में कमजोर मांग, लागत में उतार चढ़ाव तथा नियामकीय दबावों के कारण कैलेंडर वर्ष 2025 में वैश्विक इस्पात उत्पादन 2 प्रतिशत घटकर 1.85 बिलियन टन रह गया। इसके विपरीत, घरेलू इस्पात कीमतों पर दबाव के बावजूद भारतीय इस्पात उद्योग ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई. वित्त वर्ष 2026 में इस्पात उत्पादन 10.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 168.4 मिलियन टन और मांग 7.6 प्रतिशत बढ़कर 163.7 मिलियन टन तक पहुंच गई. इस वृद्धि को इन्फ्रास्ट्रक्चर , निर्माण, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार बनी मजबूत मांग का समर्थन मिला. अब आपकी कंपनी के प्रदर्शन की बात करें, तो टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया। कंपनी का समेकित राजस्व 6 प्रतिशत बढ़कर 2,32,140 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इस उपलब्धि में भारत में रिकॉर्ड लगभग 23.4 मिलियन टन क्रूड स्टील का वार्षिक उत्पादन और लगभग 22.5 मिलियन टन की डिलीवरी का महत्वपूर्ण योगदान रहा. समेकित एबिटा में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और यह बढ़कर 34,848 करोड़ रुपये हो गया। (नीचे भी पढ़ें)
वहीं, कर पश्चात लाभ में 243 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ यह 10,886 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यूरोप में हमारे ऑपरेशंस की बात करें तो, संरचनात्मक सुधारों की हमारी रणनीति अब सकारात्मक परिणाम देने लगी है. नीदरलैंड्स में एबिटा तीन गुना बढ़कर 267 मिलियन यूरो हो गया, जबकि यूनाइटेड किंगडम में हम अपने एबिटा घाटे को आधा करने में सफल रहे हैं. भारत में कंपनी का राजस्व 1,40,302 करोड़ रुपये रहा और एबिटा 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 34,272 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. लागत दक्षता, बेहतर उत्पाद मिश्रण और अधिक वॉल्यूम के कारण एबिटा मार्जिन बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया. इसके अलावा, कंपनी का समेकित शुद्ध ऋण घटकर 80,144 करोड़ रुपये रह गया, जिससे हमारी बैलेंस शीट और अधिक मजबूत हुई. वित्त वर्ष 2026 के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने प्रति इक्विटी शेयर 4 रुपये के लाभांश की अनुशंसा की है. वर्ष के दौरान कंपनी ने भारत में विस्तारीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं. इस दिशा में कलिंगानगर प्लांट के दूसरे चरण (फेज II) के विस्तारीकरण का सफल संचालन एक बड़ी उपलब्धि रही. इसके साथ ही कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 26.1 एमटीपीए हो गई, जबकि कलिंगानगर प्लांट की क्षमता 3 एमटीपीए से बढ़कर 8 एमटीपीए हो गई. भारत की सबसे बड़ी ब्लास्ट फर्नेस और अत्याधुनिक कोल्ड रोलिंग मिल के साथ हमने अपने फ्लैट प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो को रणनीतिक रूप से और मजबूत किया है. साथ ही ऑटोमोबाइल और रक्षा जैसे उच्च मूल्य एवं प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को भी सुदृढ़ बनाया है. यह हमारी दीर्घकालिक विजन के अनुरूप 40 एमटीपीए उत्पादन क्षमता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम है. कंपनी मूल्यवर्धित उत्पादों और डिजिटल माध्यमों के जरिए ग्राहकों से जुड़ाव को लगातार मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. रक्षा और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में विस्तार के साथ कंपनी ने उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है. साथ ही, ट्यूब्स, टिनप्लेट और वायर्स व्यवसायों के माध्यम से कंपनी अपनी डाउनस्ट्रीम उत्पादन क्षमता का भी लगातार विस्तार कर रही है. वर्ष के दौरान कंपनी ने कई महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल कीं. इनमें टाटा स्टील कलर्स में स्वामित्व का एकीकरण तथा थ्रिवेणी पेलेट्स में बहुमत हिस्सेदारी का अधिग्रहण शामिल है. ये दोनों कदम कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं. भारत में कंपनी की स्थिति को आगे और सुदृढ़ करने के लिए एनआईएनएल के नियोजित विस्तारीकरण के साथ हाल ही में लुधियाना में 0.75 एमटीपीए क्षमता वाली इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस का उद्घाटन किया गया है. इससे कंपनी के लॉन्ग प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो को उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी. इसके अलावा, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने एनआईएनएल के टाटा स्टील में विलय को भी मंजूरी दी है. इस विलय से विभिन्न परिचालनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा और कंपनी की कॉर्पोरेट संरचना अधिक सरल एवं प्रभावी बनेगी. यूरोप में हमने परिवर्तन के एक निर्णायक चरण में प्रवेश किया है। यूके में, यूके सरकार के सहयोग से पोर्ट टैलबोट में 1.25 बिलियन पाउंड की लागत वाली इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस परियोजना का शुभारंभ किया गया. यह यूके के इस्पात उद्योग में कम कार्बन उत्सर्जन वाली इस्पात उत्पादन प्रणाली की सबसे बड़ी परिवर्तनकारी पहल है. यह परियोजना वर्तमान में इंजीनियरिंग डिजाइन और निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों में तेज़ी से आगे बढ़ रही है. नीदरलैंड्स में परिचालन का वातावरण अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि कुछ पर्यावरणीय नियम अब यूरोपीय संघ के निर्धारित मानकों से भी अधिक कड़े हो गए हैं. उत्सर्जन संबंधी मानकों को इस स्तर तक सख्त कर दिया गया है कि टाटा स्टील नीदरलैंड्स की कुछ पुरानी उत्पादन परिसंपत्तियों के लिए नियामकों द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर व्यवहार्य समाधान फिलहाल संभव नहीं हैं. ऐसी स्थिति में कंपनी डच सरकार और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर रही है, ताकि टाटा स्टील नीदरलैंड्स के लिए ऐसा भविष्य का मार्ग तैयार किया जा सके, जो पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हो, आर्थिक रूप से वहनीय हो और दीर्घकाल में किफायती एवं व्यवहार्य साबित हो. वर्ष के दौरान टाटा स्टील नीदरलैंड्स ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और परिवर्तन लक्ष्यों को गति देने के उद्देश्य से वेटनफॉल के सह उत्पादन बिजली संयंत्रों का भी अधिग्रहण किया. ‘वन टाटा स्टील’ के रूप में हमारी परिवर्तनकारी यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है. (नीचे भी पढ़ें)
इस यात्रा में प्रबंधन का प्रमुख फोकस प्रौद्योगिकी और डिजिटल परिवर्तन पर है. इसी दिशा में हमने संपूर्ण वैल्यू चेन में 860 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआईं) मॉडल लागू किए हैं, जिनकी मदद से उत्पादन दक्षता, सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता में वास्तविक समय में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित हुआ है. इस वर्ष हमारे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स—आशियाना और डिजिका—ने मिलकर 9,360 करोड़ रुपये का सकल व्यापार मूल्य हासिल किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 161 प्रतिशत की वृद्धि है. हमारा लक्ष्य है कि प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में हो रहे निरंतर उन्नयन का उपयोग करते हुए कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत किया जाए तथा बाजार में नेतृत्व की स्थिति को बनाए रखा जाए. सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है और टाटा स्टील सभी परिचालन स्थलों पर शून्य-हानि के लक्ष्य के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. हम अपनी प्रक्रियाओं को और मजबूत कर रहे हैं, प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग कर रहे हैं तथा सुरक्षा के प्रति जागरूकता को और बढ़ा कर रहे हैं, ताकि सुरक्षा के सर्वोच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा सके. हम समावेशी विकास, जीवन की गुणवत्ता में सुधार और दीर्घकालिक सामाजिक मूल्य सृजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बरकरार रखे हुए हैं. इस वर्ष कंपनी ने सीएसआर पहलों पर 473 करोड़ रुपये खर्च किए, जिनके माध्यम से पूरे भारत में 6.9 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.







