जमशेदपुर : टाटा स्टील ने अपनी विविधता और समावेशन पहल मोज़ेक के दस वर्षों के सफर का जश्न मनाया. वर्ष 2015 में आरंभ हुई यह पहल संगठन के हर स्तर पर समावेशन को एक जीवंत अनुभव बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. इस वर्ष कंपनी प्राइड मंथ के साथ-साथ मोज़ेक के एक दशक को चिह्नित करते हुए एक समावेशी कार्यस्थल के निर्माण के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता को और सशक्त बना रही है. मोज़ेक पांच प्रमुख रणनीतिक स्तंभों, नियुक्ति, संवेदनशीलता, योग्यता को बनाए रखते हुए निरंतर विकास सुनिश्चित करना, आधारभूत संरचना और जश्न पर आधारित एक सशक्त पहल है. यह पहल महिलाओं, दिव्यांगजनों, एलजीबीटीक्यूए प्लस समुदाय और सकारात्मक कार्रवाई समूहों सहित विविध समुदायों की विशिष्ट ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, ताकि सभी के लिए एक समान, समावेशी और सम्मानजनक कार्यस्थल का निर्माण किया जा सके. टाटा स्टील की चीफ पीपल ऑफिसर, अतरई सान्याल ने कहा कि टाटा स्टील ने सदैव लोगों को केंद्र में रखकर नीतियों और संस्कृति का निर्माण किया है. (नीचे भी पढ़ें)
बीते सौ वर्षों से भी अधिक समय में हमने न केवल समय के साथ कदम मिलाया है, बल्कि उद्देश्यपूर्ण बदलावों की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई है. हमारा लक्ष्य हमेशा एक ऐसा कार्यस्थल बनाना रहा है जो समानता, सम्मान और समावेशन पर आधारित हो, जहां हर व्यक्ति को उसकी पहचान के साथ स्वीकारा जाए और उसे अपने पूर्ण सामर्थ्य के साथ योगदान देने के लिए सशक्त किया जाए. हमारी सोच की जड़ें विविधता में गहरे विश्वास में हैं, ऐसा माहौल तैयार करना जहां हर व्यक्ति न केवल शामिल हो, बल्कि फलें-फूलें और अपने सबसे रचनात्मक रूप में कार्यस्थल का हिस्सा बनें. इस वर्ष जब हम मोज़ेक की 10वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, जो 2015 में शुरू हुई एक ऐतिहासिक पहल है तो यह जश्न सिर्फ बीते सफर का नहीं, बल्कि आगे की राह में और भी मजबूत प्रतिबद्धता, स्पष्टता और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का प्रतीक है. मोज़ेक की शुरुआत के एक दशक बाद, यह पहल टाटा स्टील में कई परिवर्तनकारी समावेशन प्रयासों की आधारशिला बन चुकी है. इस यात्रा में शामिल हैं, वीमेन ऑफ़ मेटल छात्रवृत्ति (2017), वीमेन @ माइंस पहल (2019), क्वीरियस – एलजीबीटीक्यूआइए प्लस छात्रों के लिए केस स्टडी प्रतियोगिता, और 2021 में खदानों में ट्रांसजेंडर एचईएमएम ऑपरेटरों का समावेश. 2023 में कंपनी ने दिव्यांग छात्रों के लिए अनंता क्वेस्ट की शुरुआत की और पहली बार महिला फायरफाइटर प्रशिक्षुओं के बैच को शामिल किया. सबसे हाल ही में, 2024 में टाटा स्टील ने नोवामुंडी में देश की पहली संपूर्ण रूप से महिलाओं की माइनिंग शिफ्ट को सफलतापूर्वक चालू किया. इन सभी पहलों ने न केवल रूढ़ियों को तोड़ा, बल्कि एक ऐसा कार्यस्थल गढ़ा है जहां विविधता को खुले मन से स्वीकारा जाता है और समावेशन, हर रोज़ की सोच और व्यवहार में रच-बस गया है. यहां हर व्यक्ति को समान अवसर मिलते हैं—बढ़ने, नेतृत्व करने और बदलाव लाने के. टाटा स्टील का लक्ष्य है कि वर्ष 2028 तक अपने समूह स्तर के कार्यबल में 20 फीसदी विविधता सुनिश्चित की जाए है. कंपनी की विविधता को लेकर प्रतिबद्धता सिर्फ नीतियों तक सीमित नहीं है. यह पारंपरिक सोच को चुनौती देने और खासकर पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में सामाजिक मानदंडों को पुनर्परिभाषित करने का एक सशक्त प्रयास है. (नीचे भी पढ़ें)
टाटा स्टील की प्रगतिशील एचआर नीतियां इस सोच को ज़मीन पर उतारती हैं, जहां एलजीबीटीक्यूआइए प्लस पार्टनर्स को समान लाभ, जेंडर न्यूट्रल पेरेंटल लीव, जेंडर ट्रांजिशन में सहयोग, और सभी के लिए समावेशी रिलोकेशन व ट्रैवल सुविधाएं सुनिश्चित की जाती हैं. इन पहलों के माध्यम से टाटा स्टील न केवल एक अधिक समान और समावेशी कार्यस्थल का निर्माण कर रही है, बल्कि पूरे उद्योग जगत के लिए एक नई दिशा भी तय कर रही है. 2023 में, टाटा स्टील को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा ग्लोबल डाइवर्सिटी, इक्विटी एंड इन्क्लूजन (डीइआइ) लाइटहाउस के रूप में चुना गया. यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की एकमात्र कंपनी बनी, और दुनिया भर की केवल आठ अग्रणी संस्थाओं में इसका नाम शामिल हुआ. 2024 में, कंपनी ने एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की. इंडिया वर्कप्लेस इक्वालिटी इंडेक्स (आइडब्ल्यूइआइ) ने टाटा स्टील को लगातार चौथे वर्ष गोल्ड एम्प्लॉयर के रूप में मान्यता दी. यह मान्यता कंपनी की उन समावेशन पहलों का परिणाम है जो लिंग, यौन विविधता और दिव्यांगता जैसे विभिन्न आयामों को समान रूप से सम्मान और अवसर प्रदान करती हैं.



