
जमशेदपुर : टाटा स्टील के न्यू सीरीज (एनएस) ग्रेड के कर्मचारियों में प्रोमोशन पॉलिसी में एकरुपता नहीं होने के कारण काफी गुस्सा देखा जा रहा है. टाटा स्टील की अधीकृत टाटा वर्कर्स यूनियन पर इसका दबाव बढ़ा दिया गया है. यहीं वजह है कि टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबरों के वाट्सएप ग्रुप में जबरदस्त जंग छिड़ चुकी है. बताया जाता है कि वर्तमान में कंपनी के मेंटेनेंस विभागों और कुछ कम महत्व के ऑपरेशन विरभागों में सुपरवाइजर और एनएस 7 के कर्मचारियों को वी-14 और एनएस 9 से ऊपर में प्रोमोशन का स्कोप नहीं है जबकि ऑपरेशन के कई विभागों में वी 20 और एनएस 12 तक प्रोमोशन की संभावनाएं है. इसको लेकर गुस्सा है कि सभी विभागों में इस तरह का प्रोमोशन देने की मांग की गयी है. इसको लेकर अध्यक्ष, महामंत्री और डिप्टी प्रेसिडेंट के अलावा तमाम पदाधिकारियों को घेरने की कोशिश की गयी है. इसको लेकर यूनियन के विपक्षी कमेटी मेंबर आरसी झा ने तो अध्यक्ष को बकायदा पत्र ही लिख दिया है. उन्होंने एनएस ग्रेड के कर्मचारियों की बातों पर सहमति जतायी है. उन्होंने कहा है कि कर्मचारी और सुपरवाइजर वर्ग में कई ऐसी सुविधाएं हैं, जो मेंटेनेंस ग्रुप के लिए परंपरागत रूप से नहीं हैं परन्तु ऑफिसर वर्ग में जिस तरह जॉब रोटेशन और प्रमोशन पद्धति है, जिससे यह लगता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो यूनियन उन्हें प्राप्त कर सकते हैं. श्री झा ने बताया है कि उदाहरण के लिए अफसर वर्ग में मेंटेनेंस और ऑपरेशन के पदाधिकारियों के प्रमोशन की पद्धति और लिमिट में कोई अंतर नहीं है. आइएल-6 आने के बाद उस तरह के कई उदाहरण हैं, जिन्हें देखकर यह लगता है कि जो कर्मचारी आइएल-6 नहीं बनता, उसके लिए मेंटेनेन्स ग्रुप में प्रमोशन की उचित पद्धति नहीं है जिसपर यूनियन को काम करने की आवश्यकता है. जैसे कोई मेन्टेनेन्स का जूनियर इंजीनियर या सुपरवाइजर अगर आइएल-6 बन जाता है तो वह कालांतर में उस स्तर तक जा सकता है, जहां तक ऑपरेशन का जूनियर इंजीनियर या सुपरवाइजर आईएल-6 बनने के बाद जा सकता है. उसी प्रकार अगर कोई मेंटेनेंस में काम करने वाला जूनियर इंजीनियर अथवा सुपरवाइजर अगर चाहे तो ऑपरेशन में आइएल-6 बन जाता है और आगे भी जा सकता है.
उपरोक्त उदाहरणों से लगता है कि यूनियन नेतृत्व अगर सामूहिक प्रयास करे तो यह कार्य बिल्कुल सम्भव है. उन्होंने इसका समाधान निकालने की मांग की है. वैसे एसएनटीआइ के राजीव चौधरी ने तो इशारों में ही सत्ता को चुनौती दी है. उन्होंने कहा है कि करीब 14 साल पहले उन्होंने अपने गांव के बगीचे के लिए एक माली को स्पेशल ट्रीटमेंट के नाम पर काफी पैसे दिए, लेकिन उसके जाने के बाद उसने देखा कि कई पेड़ में ग्रोथ नहीं हो रही है और वह बोनसाई बन चुका है. अगर किसी की नजर में कोई ऐसा माली हो जो कि पुनः उसका ग्रोथ वापस ला सके तो वे जरूर बताइएगा. उन्होंने कहा है कि उनको लगता है कि कुछ ऐतिहासिक गलतियां सुधारना बहुत मुश्किल काम है. वहीं, सीआररएम के सूरज कुमार ने कहा है कि इस ग्रोथ की चिंता का समर्थन वे करते है. मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं. उन्होंने कहा है कि उनके विभाग के एनएस ग्रेड के कर्मचरियों की भी यही मांग है. मेंटेनेंस के कर्मचारियों के मनोबल के लिए असमानता दूर करना ज़रूरी है. आने वाला फ्यूचर एनएस का ही है इसलिए वे सारे लोग को उनके ग्रोथ के लिए बात करनी है. इस पर विचार और एक्शन ज़रूरी है. इसी तरह ब्लास्ट फर्नेस के कुंदन सिन्हा ने कहा है कि बात सिर्फ एनएस की नहीं है. बात को मेंटनेंस के सारे कर्मचारियों की है, जिसमें ब्लाक 4 का होना निहायत ही जरूरी है क्योंकि आज के आधुनिक प्लांट में अगर कहीं नॉलेज, स्किल और जिम्मेदारी का विस्तार है तो वो मेंटेनेंस के लोगों का ही है. ऐसा भी नहीं है कि इस पर बात नहीं हुई है. डब्ल्यूसीएम समझौता के समय पर ही इस पर विस्तार से चर्चा हुई थी, थोड़ा सा बदलाव भी किया गया है, लेकिन अब सिर्फ डिलीवरी की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यह ज्यादा भारी काम नहीं है क्योंकि इस पर पहले सहमति देने वालों में आज के वीपी एसएस और टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष भी शामिल है, इस कारण उम्मीद जगी है कि अभी नहीं तो कभी नहीं.





