
जमशेदपुर : टाटा स्टील के ट्यूब-टिस्को निबंधित पुत्र-पुत्री संघ ने टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा है. इसमें मांग की गयी है कि उनका नियोजन तत्काल किया जाये. उन लोगों ने कहा है कि आखिर निबंधितो के नियोजन में ही क्यों इतना विलम्ब हो रहा हैं जबकि टाटा स्टील कंपनी की वेंडर (ठेका) कंपनियां जैसे: आइबीएम, डीपीएस, यौगिक, फस्ट फेस आदि के अन्दर काम करने वाले ठेका कर्मचारियों को टाटा स्टील कंपनी ने एक नयी कंपनी “टाटा ओटौन “ बनाकर अपने अन्दर 5 लाख वेतन प्रति वर्ष पर समायोजित कर लिया जबकि वर्ष 2019 में हुए 500 निबंधित पुत्र की बहाली लिखित परीक्षा के माध्यम से और शेष बचे हुए निबंधितो की बहाली निट कंपनी बनाकर नियोजन देने का समझौता टाटा स्टील मेनेजमेन्ट और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच हुआ था. निट कंपनी के बनने से लेकर निबंधितो की इसमें नियोजन की सारी प्रकिया वर्ष 2020 के आखिरी महीने में यूनियन के पूर्व अध्यक्ष आर रवि प्रसाद और टाटा स्टील के पूर्व वीपी एचआरएम सुरेश दत्त त्रिपाठी के बीच ही पूरी कर ली गई थी. इन लोगों ने जानना चाहा है कि “ टाटा ओटौन “ नाम की कंपनी बनाकर वेंडर (ठेका) के अन्दर काम करने वाले बाहरी लोगों का नियोजन इस कोरोना महामारी काल में हो सकता है तो निट कंपनी बनने के इतने महिने बीत जाने के बाद भी निबंधितो की बहाली क्यों शुरू नहीं की गई? आज जब कोरोना महामारी की गति धीमी हो गई है तो क्या यह उचित समय नहीं है, निबंधितो के नियोजन का क्या टाटा वर्कर्स यूनियन तीसरी लहर का इंतजार कर रही है. उन्होंने कहा कि सभी निबंधित ये चाहते हैं कि टाटा वर्कर्स यूनियन उनको समाचार पत्रों के माध्यम से ये अवगत करवायें कि निट कंपनी मे नियोजन की प्रकिया आखिर किस चरण में है और ये कब से शुरू होगी ? इस निच कंपनी में सभी निबंधितो के लिए क्या- क्या प्रावधान है? इस मांग को लेकर लिखे गये पत्र में निवेदक के तौर पर राकेश कुमार सिंह, दिलीप कुमार, रंजीत कुमार, चन्द्रशेखर, अंकित कुमार, रानी दास, प्रदीप कुमार, सोहन सिंह, उमा भारती आदि शामिल है.






