जमशेदपुर : टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट कारपोरेट सर्विसेज डीबी सुंदर रामम ने कहा है कि टाटा स्टील में खेल केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं हैं. वे हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं और स्वस्थ जीवनशैली, समावेशिता, अनुशासन और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम हैं. खेलों के प्रति हमारी यह प्रतिबद्धता लगभग एक सदी पुरानी है और आज भी भारत के खेल जगत में हमारे योगदान को नई दिशा दे रही है. इस विरासत की नींव सर दोराबजी टाटा ने रखी थी, जिन्होंने 1920 में एंटवर्प ओलंपिक के लिए भारत की पहली ओलंपिक टीम को आर्थिक सहयोग दिया था. तब से टाटा स्टील देश में खेलों को बढ़ावा देने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक बनकर उभरी है और कई पीढ़ियों के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को निरंतर सहयोग देती रही है. खेलों के क्षेत्र में हमारी उपलब्धियों की गौरवशाली सूची में 1 पद्म भूषण, 12 पद्म श्री, 1 खेल रत्न, 6 द्रोणाचार्य, 42 अर्जुन और 1 ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार विजेता शामिल हैं. आज टाटा स्टील 19 खेल विधाओं में अकादमियों और प्रशिक्षण केंद्रों का एक मजबूत खेल तंत्र संचालित करती है. इनमें फुटबॉल, तीरंदाजी, हॉकी, एथलेटिक्स, तैराकी, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, क्रिकेट, गोल्फ, रोइंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग सहित अन्य खेल शामिल हैं. ये संस्थान खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स मेडिसिन, पोषण, मानसिक मजबूती के लिए प्रशिक्षण और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, जिससे उन्हें अपनी पूरी क्षमता हासिल करने में मदद मिलती है. (नीचे भी पढ़ें)
हमारी प्रमुख खेल पहलों में टाटा फुटबॉल अकादमी, टाटा आर्चरी अकादमी, नवल टाटा हॉकी अकादमी, टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन, रोइंग अकादमी और स्पोर्ट क्लाइम्बिंग अकादमी शामिल हैं. डीबी सुंदर रामम ने कहा कि इन केंद्रों ने कई उत्कृष्ट खिलाड़ियों को तैयार किया है. इनमें फुटबॉल खिलाड़ी कल्याण चौबे और सुब्रत पॉल, तीरंदाज दीपिका कुमारी, कोमोलिका बारी, जयंत तालुकदार, अंकिता भकत और भजन कौर तथा पैरा-बैडमिंटन चैंपियन उमेश विक्रम कुमार शामिल हैं. हाल ही में आशीष तानी पूर्ति ने मस्कट, ओमान में आयोजित मेंस यूथ हॉकी5एस एशिया चैंपियनशिप 2026 में भारतीय पुरुष युवा हॉकी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया. 14 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी अधिराज मित्रा ने भी झारखंड का गौरव बढ़ाया है. इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें निरंतर सहयोग देने के लिए टाटा स्टील के दीर्घकालिक निवेश के प्रभाव को दर्शाती हैं. 1987 में स्थापित टाटा फुटबॉल अकादमी अब तक 300 से अधिक कैडेट्स को प्रशिक्षण दे चुकी है, जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत ने विभिन्न आयु वर्गों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. इनमें से कई खिलाड़ी आगे बढ़कर पेशेवर फुटबॉल में अपनी पहचान बना चुके हैं. अकादमी को 2026-27 सत्र के लिए ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआइएफएफ) की प्रतिष्ठित 5-स्टार मान्यता भी मिली है। इसी तरह, टाटा आर्चरी अकादमी झारखंड, ओडिशा और आदिवासी समुदायों की प्रतिभाओं को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से निखारने के लिए एक प्रतिष्ठित केंद्र के रूप में स्थापित हुई है. 3 रीजनल डेवलपमेंट सेंटर और 32 ग्रासरूट स्तर के प्रशिक्षण केंद्रों के सहयोग से नवल टाटा हॉकी अकादमी भविष्य के हॉकी खिलाड़ियों की मजबूत श्रृंखला तैयार करने में लगातार जुटी है. ये सभी अकादमियां इस विश्वास को दर्शाती हैं कि उत्कृष्टता हासिल करने के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता, अवसर और विशेषज्ञ मार्गदर्शन जरूरी हैं. उच्चस्तरीय खेलों के साथ-साथ, हमारा ध्यान जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को विकसित करने पर भी है. सामुदायिक कार्यक्रमों और फीडर सेंटरों के माध्यम से टाटा स्टील हर साल हजारों युवाओं को खेलों से जोड़ती है, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को. 2025-26 में 29,000 से अधिक युवाओं ने इन पहलों में भाग लिया. इन कार्यक्रमों के जरिए उन्हें न केवल खेलों के अवसर मिले, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन, शिक्षा और बेहतर भविष्य के नए अवसर भी मिले. एडवेंचर स्पोर्ट्स हमारी खेलों के प्रति सोच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन के माध्यम से कई पर्वतारोहियों ने दुनिया की कुछ सबसे कठिन चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की है. इनमें 13 पर्वतारोही शामिल हैं, जिन्होंने माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की है. ये उपलब्धियां साहस, दृढ़ता और निरंतर प्रयास जैसे उन मूल्यों को दर्शाती हैं, जिन्हें खेल हमारे जीवन में विकसित करने में मदद करते हैं. टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट डीबी सुंदर रामम ने कहा कि हमारी प्रतिबद्धता केवल खिलाड़ियों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिक से अधिक लोगों को खेलों से जोड़ने पर भी हमारा विशेष जोर है. टाटा स्टील, टाटा स्टील वर्ल्ड 25K कोलकाता, जमशेदपुर, जोडा और कपिलाश रन-ए-थॉन के साथ-साथ यूरोप में लानेली हाफ मैराथन, रिचर्ड बर्टन 10के और टाटा किड्स ऑफ स्टील जैसे आयोजनों को प्रायोजित करती है. कंपनी विश्वस्तरीय शतरंज से भी जुड़ी हुई है. टाटा स्टील चेस इंडिया एशिया का एकमात्र रैपिड और ब्लिट्ज आयोजन है, जो ग्रैंड चेस टूर का हिस्सा है. इसके अलावा, नीदरलैंड्स में आयोजित प्रतिष्ठित टाटा स्टील चेस टूर्नामेंट में 1938 से ही दुनिया के शीर्ष शतरंज खिलाड़ी हिस्सा लेते आ रहे हैं. श्री रामम ने कहा कि आगे बढ़ते हुए, हमारा विजन प्रतिभाओं को निखारने, खेलों तक पहुंच बढ़ाने और भारत के खेल तंत्र को और मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा. जमीनी स्तर पर खेलों के विकास, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण अकादमियों और समावेशी भागीदारी में निवेश के माध्यम से टाटा स्टील आगे भी चैंपियन तैयार करने के साथ-साथ स्वस्थ, आत्मविश्वास से भरे और सशक्त समुदायों के निर्माण में योगदान देती रहेगी. टाटा स्टील में खेल केवल एक गतिविधि नहीं हैं. वे हमारी जीवनशैली का हिस्सा हैं और हमेशा बने रहेंगे.




