जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों के वेज रिवीजन समझौता लंबित है. इस पर वार्ता थम सी गयी है. दरअसल, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु की पत्नी के हार्ट में ब्लॉकेज आया था. इस ब्लॉकेज के आने के बाद उनकी उच्चस्तरीय इलाज के लिए कोलकाता रेफर कर दिया गया. कोलकाता में उनका इलाज चल रहा है. खुद संजीव चौधरी टुन्नु अपनी दो बेटियों के साथ उनकी पत्नी का इलाज करा रहे है. उनके इलाज में हो रही देरी के कारण यह स्थिति बनी है. हालांकि, कंपनी में मार्च माह में ज्यादा कामकाज नहीं हुआ क्योंकि अधिकारियों का परफार्मेंस की जांच चल रही थी. करीब चार दिनों पहले ही सारे अधिकारी इससे फ्री हुए है. अब वार्ता शुरू हुई है. यह उम्मीद जतायी जा रही है कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो अध्यक्ष संजीव चौधरी वापस काम पर लौट जायेंगे. इसके बाद वार्ता तेज होगी. आपको बात दें कि 31 दिसंबर 2024 तक ही वेज रिवीजन समझौता लागू था. उसके बाद से वेज रिवीजन समझौता लंबित हो गया है. अब डेढ़ साल से वेज रिवीजन लंबित हो गया है. (नीचे भी पढ़ें)
गौरतलब है कि 31 दिसंबर 2024 तक ही 2019 को हुए वेज रिवीजन को लागू किया गया था. इसके बाद से यह 1 जनवरी 2025 से लंबित हो गया है. टाटा वर्कर्स यूनियन की ओर से इसके वेज रिवीजन समझौता का एक प्रस्ताव यूनियन की ओर से भेजा गया है. टाटा स्टील के लगभग 11 हजार कर्मचारियों को इस बार भी ग्रेड रिवीजन समझौते के लिए इंतजार कर रहे है. वैसे यूनियन नेताओं की दलील है कि हर समझौता ग्रेड लंबित होने के डेढ़ से दो साल के बीच होता रहा है. पिछला ग्रेड रिवीजन समझौता तत्कालीन यूनियन अध्यक्ष आर रवि प्रसाद एंड टीम की ओर से 21 माह के इंतजार के बाद 23 सितंबर, 2019 को किया था. इससे पहले तत्कालीन अध्यक्ष पीएन सिंह की अगुवाई में 2012 में समझौता हुआ था. (नीचे भी पढ़ें)
2019 का ग्रेड रिवीजन 7 वर्षों के लिए हुआ था, जो 31 दिसंबर, 2024 तक प्रभावी था. टाटा वर्कर्स यूनियन की ओर से प्रबंधन को भेजे गये चार्टर ऑफ डिमांड में कई अहम मुद्दे शामिल किए गए हैं. इनमें यूनिफॉर्म वेज स्ट्रक्चर के कारण कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए बनी नयी व्यवस्था को समाप्त करना, ग्रेड की अवधि को 5 साल करना, वर्किंग डे को 5 दिन करना, 10 साल नौकरी करने वाले कर्मचारियों को विदेश यात्रा की सुविधा देना, 100 फीसदी डीए को बेसिक में मर्ज कर नया बेसिक बनाना, एमजीबी को 50% करना, पीएफ में कंपनी का योगदान 20 फीसदी करना, और हाउस रेंट अलाउंस को बेसिक डीए का 40% करना शामिल हैं. यदि संजीव कुमार चौधरी अपनी मांगों को मनवाने में सफल होते हैं, तो वह 100 साल पुरानी टाटा वर्कर्स यूनियन के इतिहास में कर्मचारियों के लिए सबसे बेहतर वेज रिवीजन समझौता करने वाले अध्यक्षों में पहले स्थान पर होंगे. इसके अलावा, चार्टर ऑफ डिमांड में कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी शामिल हैं. इनमें ब्लॉक 2 से 3 में जाने के लिए डिप्लोमा की बाध्यता खत्म करना, नाइट शिफ्ट एलाउंस को 750 रुपये करना, होलीडे होम की जगह टिएचपी सुविधा प्रदान करना, एजुकेशन एलाउंस को 600 रुपये से बढ़ाकर ढाई हजार रुपये करना, कर्मचारियों के घर के लिए फिक्सअप की व्यवस्था करना और रिटायर कर्मचारियों को कार्यरत कर्मचारियों जैसी मेडिकल सुविधा देना शामिल है.



