
गुडाबांधा : प्रखंड के बीहड़ और जंगल पहाड़ी इलाका पावड़ाडीह गांव में हाथियों के आतंक से गांव के ग्रामीण भयभीत है. हाथियों के झुंड ने गांव के 9 घरों को तोड कर वहां रखे धान और चावल को खा लिया है. ग्रामीणों ने बताया कि 15 हाथियों के झुंड में तीन बच्चे भी हैं. हाथियों का दल अब भी पावड़ाडीह, राजाबासा, खजुरदाड़ी और कारलाबेडा गांव के समीप ही है. हाथियों के झुंड को भाकर गांव के जंगल के समीप झरना के पास देखा गया है.

अबतक हाथियों के झुंड ने 9 घरों तो क्षतिग्रस्त किया है, जिसमें पावड़ाडीह गांव में 4 , राजाबासा गांव में 2, खजुरदाड़ी गांव में 1 और कारलाबेडा गांव में 2 घरों को पूरी तरह से नुकसान पहुंचाया है. हाथियों का सबसे अधिक कहर पावड़ाडीह गांव में ही है. गांव के लोग हाथियों के भय से गांव के स्कूल भवन में शरण ले रहे है. पावड़ाडीह 4 और राजाबासा के 2 परिवार स्कूल भवन में ही रहते हैं. लोगों ने बताया कि हाथियों के आने पर पीडित परिवार समेत गांव के लोग स्कूल की छत पर चढ़ जाते हैं. गांव के ग्रामीण स्कूल की छत पर तिरपाल लगाकर रात बिताते है.

उन्होंने बताया कि रात के समय ग्रामीण स्कूल की छत पर बांस जलाकर मशाल बनाते है और छत पर बड़े बड़े पत्थर रखे गये है , बर्तन और ढोलक बजाकर हाथियों को भगाने का काम करते है. ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग के कर्मी हाथियों के उत्पात के बाद गांव तो आते हैं, वे मुआवाज के लिये फार्म दे कर चले जाते है. लेकिन आज तक किसी को मुआवाज नहीं मिला है. साथ ही ग्रामीणों ने वन विभाग से टार्च की मांग की है परंतु अबतक टार्च नहीं मिला है. पावड़ाडीह गांव में कुल 15 घर है सभी घर कच्चे मिट्टी और टाली के बने है.गांव में बिजली, पानी, सड़क और पीएम आवास नही है.

ग्रामीण बताते हैं कि मिट्टी की दीवार होने के कारण हाथियों के झुंड आसानी से दीवार को तोड़ कर घर पर रखे चावल और धान खा लेते है.हाथियों के झुंड से गांव में आंतक है , फिलहाल गांव के लोग इन दिनों अपनी जान बचाने के लिये स्कूल भवन में शरण ले रखी है.हालाकी हाथियों के आंतक और नुकसान की खबर पर घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन ने गांव का दौरा कर पीडित परिवार को तिरपाल और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराया है. मुखिया की ओर से भी तिरपाल और खाद्य सामग्री ग्रामीणों के बीच वितरण किया गया है.







