रामगोपाल जेना/चाईबासा : जिला परिषद् सदस्य जॉन मिरन मुंडा के आवास में बेरोजगार युवको के साथ रोजगार को लेकर बैठक आयोजित हुई. बैठक में युवाओं का कहना था कि झारखंड अलग राज्य बनने एवं जिले में टाटा, एसीसी व रुंगटा जैसी कंपनियों के रहते भी रोजी के लिए पलायन युवाओं की मजबूरी बन गया है, युवा कहीं पलायन नहीं करना चाहते, क्योंकि पलायन करने से उनका बहुत नुकसान होता है और वे परिवार से दूर रहते हैं. बीमार होने पर किसी की देखभाल नहीं कर सकते हैं और कभी कभी ठेकदार पैसे भी नहीं देते हैं. जॉन मिरन मुंडा ने बताया कि बहुत दुखद बात है कि आज जिला खनिज सम्पदा से भरा होने के बाद भी यहां रोजगार का अभाव है. सरकार में विकास के नाम पर सिर्फ कमीशन कमाने और योजनाओं में लूट मचाने का धंधा चल रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि सरकार को झारखंड राज्य का विकास करने के लिए कृषि को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि किसान पूरे वर्ष खेती कर सकें. इसके अलावा खदान-कारखानों में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार दिलाने की नीति बनानी चाहिए, लेकिन अभी तक नियोजन नीति नहीं बनी. महिलाओं को मंइयां सम्मान योजना का लाभ देकर युवाओं के साथ भेदभाव किया गया है. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पलायन रोकने के लिए बड़े आंदोलन का तैयारी करनी होगी और आगामी 20 मई को एसीसी कम्पनी गेट के सामने धरना प्रदर्शन कर स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की जाएगी. बैठक में काफी संख्या में बेरोजगार युवक शामिल रहे.











