
चाईबासा : देश में कोरोनावायरस के कारण हुए लाॅकडाउन से उधोगों पर अच्छी मार पड़ी है। उधोगों के बंद होने से संपूर्ण भारत में मजदूरों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। झारखंड ऐसा राज्य है जहां से लाखों की संख्या में लोग दूसरे राज्यों में जाते हैं। परन्तु इसे विडंबना कहें जहां कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन से उधोग बंद हो गए हैं। उधोगों के बंद होने से अब कामगारों के बीच आर्थिक संकट उत्पन्न हो गई है। ऐसे में अब लोगों को अपने घरों की याद आने लगी है। मजदूर अपने अपने जगहों से झारखंड वापस जाने का मन बना चुके हैं। परन्तु देश में संपूर्ण लॉकडाउन की स्थिति में घर वापस लौटना संभव नहीं है।
राजनितिक माहौल भी गर्म है। पर इन्हें सब के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने राज्यों के लोगों को वापस लाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। लोगों को लाने का सिलसिला शुरू हो चुका है। दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर वापसी का रजिस्ट्रेशन कराने में सुबह से शाम तक लाइन लग रहे हैं। कहीं लाठी तो कहीं गाली खानी पड़ रही है। अब तो ठेकेदार भी हाथ खड़े कर रहे हैं। मजदूरों के सामने आर्थिक समस्या उत्पन्न हो गई है। लोग पैदल ही अपने राज्य हजारों किलोमीटर चलने के लिए मजबूर हो गए हैं। कुछ मजदूर सरकारी योजनाओं की आस में हैं तो कुछ विधायकों द्वारा भेजे जा रहे रुपयों के इंतजार में। ऐसा ही वाकया है गुजरात के वालसाड़ जिले उमरगांव गांधी वाड़ी का, जहां सैकड़ों मजदूर तांतनगर प्रखंड पश्चिमी सिंहभूम जिले के लोग फंसे हुए हैं।
उनका ठेकेदार फरार हो गया है। अब उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। परिवार की सहायता को गए थे लेकिन अब परिवार पर ही आश्रित हो गए हैं। विधायक कोष का पैसा 2000/1000 भी उनके खाते में नहीं आया। सब्र का बांध टूटता दिख रहा है। युवा कांग्रेस के कार्यकारी जिलाध्यक्ष दीनबंधु बोयपाई से भी गुहार लगाई गई। उन्होंने आला-अधिकारियों को उनकी स्थिति से अवगत कराने की बातें कही। दीनबंधु बोयपाई ने जल्दबाजी में फैसला नहीं लेने और धौर्य बनाए रखने की बात कही और कहा कि सरकार आपकी सुधि अवश्य लेगी। उन्होंने कहा कि साथ ही साथ सांसदगीता कोड़ा को भी इससे अवगत कराया जाएगा ताकि आपकी सहायता हो सके।















