
Chaibasa : पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा ने कहा कि आजादी से पहले ब्रिटिश काल में 1871 के जनगणना में ट्राईबल रिलीजन कोड के अन्तर्गत आदिवासियों की गणना होती थी। आजादी के बाद 1951 के जनगणना में भी ट्राईबल रिलीजन कोड के अन्तर्गत आदिवासियों का गणना हुई थी, लेकिन 1961 के जनगणना प्रपत्र में एक राजनीतिक साजिश के आदिवासियों के धर्म कोड को समाप्त कर दिया। इसलिए आदिवासियों की रक्षा के लिए यह अत्यंत जरूरी है कि आदिवासी धर्म कोड लागू हो। आदिवासियों का धर्म कोड नहीं होने से लगातार आदिवासियों की जनसंख्या सरकारी आंकडों में घटती जा रही हैं, जिससे आदिवासियों के प्रतिनिधित्व, आरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। धर्म कोड नहीं होने के कारण आदिवासी अपने ही देश में शरणार्थी बनकर जीने को विवश हैं। ये बातें आदिवासी संघर्ष समिति, जगन्नाथपुर अनुमंडल के तत्वाधान में बडानन्दा पंचायत भवन में ग्रामीण मुन्डा बलराम बोबोंगा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में श्री बोबोंगा ने कही।
जगन्नाथपुर भाग-1 के जिला परिषद सदस्य अभिषेक सिंकू ने कहा कि एनआरसी, सीएए, आदिवासी विरोधी कानून हैं, जिसका हम सभी को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर विरोध करना होगा। क्योंकि देश के अधिकतम आदिवासी पढे-लिखे नहीं हैं, निर्दोष हैं, जागरूकता का घोर अभाव है और ऐसी परिस्थिति में अपने पूर्वजों का कोई मान्य प्रमाण पत्र नागरिकता साबित करने के लिए जमा नहीं कर पायेंगे। यह कानून आदिवासियों के हित के विपरीत है। कार्यक्रम को सुनील अंगरिया, बसु हो बोबोंगा, वार्ड सदस्य सोनाराम जेराई, सुरेश जेराई, सागर सिंकू, दिलीप सोरेन, बड़ानन्दा पंचायत मुखिया कानुराम बोबोंगा, गुरुचरण सिंकू व अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन ग्रामीण मुन्डा बलराम बोबोंगा और बैठक का संचालन विनीत लागुरी ने किया। बैठक में विकास केराई, गारदी लागुरी, जोगेन बोबोंगा, गंगा बोबोंगा, दुलू बोबोंगा, सोमा बोबोंगा, सिंग बोबोंगा, रोया लागुरी, सी अंगरिया, सावन लागुरी समेत अन्य लोग उपस्थित थे।







