
चाईबासा : प्राकृतिक आस्था स्थल तमाड़बांध (तांबो) के देशाऊली में हिन्दू पद्धति से पूजा करने वाली लगभग 30 महिलाओं को ग्रामीण मुण्डा चरण बोदरा के नेतृत्व में स्थानीय लोगों एवं आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों के द्वारा रोक लगाया गया। बताया गया कि रविवार को दोपहर करीब एक बजे के आस-पास पीले रंग की साड़ी में देशाऊली की ओर महिलाएं जाती हुई दिखीं और धीरे-धीरे देशाऊली के अंदर प्रवेश कर हिंदू पद्धति से पूजा करना आरंभ कर दिया। देशाऊली के आस-पास रह रहे स्थानीय लोगों को इस गतिविधि की जानकारी हुई, तो उन्होंने ग्रामीण मुण्डा एवं आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों को टेलीफोनिक पर सूचित किया। सूचना पाकर तमाम लोग जुटे और कड़ा विरोध किया। आस्था स्थल के अपमान एवं अपवित्र होने की बात कहते हुए महिलाओं को स्थानीय लोगों के द्वारा घेर लिया गया। इसे पारंपरिक रीति-रिवाज से ग्राम के दियुरियों द्वारा शुद्धिकरण करने के लिये तुरंत पंचायती की गयी और कड़ी चेतावनी देते हुए उक्त महिलाओं को पारंपरिक विधि-विधान के अनुरूप जुर्माना का फरमान सुनाया गया। (नीचे भी पढ़ें)

इसके साथ ही उन महिलाओं को उस स्थल से अविलंब पूजा सामग्री हटाने का कड़ी हिदायत देते हुए देशाऊली के आस-पास से भगाया गया। महिलाओं ने अपनी गलती को स्वीकार की और क्षमा मांगते हुए पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार जो भी जुर्माना होगा उसे भरने के लिये तैयार हुई. इन्ही शर्त्तों के साथ मामले को शांत करते हुए आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों ने किसी भी गांव के प्राकृतिक आस्था स्थल देशाऊली में छेड़छाड़ न करने की चेतावनी दी। ऐसे स्थति में हर गांव के ग्रामीणों से जोरदार विरोध करने की अपील की गयी। दरअसल तमाड़बांध की देशाऊली के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए चहारदीवारी का निर्माण किया गया है और इसके पश्चिम दिशा की दीवार टूटी हुई है। स्थानीय लोगों ने इसकी तुरंत मरम्मत कराने की मांग उठायी है। इस दौरान ग्रामीण मुण्डा चरण बोदरा, डाकुवा मानसिंह देवगम, जॉन बोदरा, संजय बोदरा, आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ बबलू सून्डी, केन्द्रीय महासचिव इपिल सामड, जिलाध्यक्ष गब्बर सिंह हेम्ब्रम, सीकेपी अनुमंडल अध्यक्ष मदन बोदरा, सदस्य शंकर सिदु, विनयजीत कुंकल, सुरेश देवगम, नंदलाल आल्डा, गुलिया आल्डा समेत अन्य लोग उपस्थित थे।




