
जमशेदपुर : दिल्ली स्थित एनसीएलएटी ने बंद पड़े केबुल कंपनी (इंकैब इंडस्ट्रीज) के मजदूरों द्वारा दायर कंपनी अपील संख्या 348/ 2020 और कंपनी अपील संख्या 720/ 2020 पर आदेश सुनाते हुए न्याय निर्णयन अधिकार, एनसीएलटी, कोलकाता द्वारा इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ 07.02.2020 को पारित परिसमापन आदेश को रद्द कर दिया और न्याय निर्णयन अधिकार, एनसीएलटी, कोलकाता को इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड की दिवाला समाधान प्रक्रिया की शुरूआत (पुनर्द्धार) करने का आदेश दिया. ज्ञातव्य है कि दिनांक 08.04.2021 को अपीलीय न्यायाधीकरण, एनसीएलएटी, नयी दिल्ली ने एनसीएलटी द्वारा 07.02.2020 को इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ दिये गये परिसमापन आदेश के खिलाफ अपीलीय न्यायाधीकरण में इंकैब इंडस्ट्रीज के मजदूरों द्वारा दायर अपील पिटीशन पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. अपीलीय न्यायाधीकरण ने उक्त अपील पर अपना आदेश पारित करने के लिए तीन कानूनी सवाल सूत्रित किये कि, क्या कमला मिल्स लिमिटेड और फस्क्वा इंवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड जो रमेश घमंडीराम गोवानी की कंपनियां हैं, इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड की संबंधित कंपनियां हैं? क्या बैंकों द्वारा अपने अनर्जक आस्तियां (एनपीए) को प्राईवेट कंपनियों कमला मिल्स लिमिटेड और फस्क्वा इन्वेस्टमेंट प्राईवेट को बेचना गलत है? और, क्या रिजोल्यूशन प्रोफेशनल केवल दावों की प्रस्तुति के आधार पर लेनदारों की समिति बना सकता है? अपीलीय न्यायाधीकरण ने रमेश घमंडीराम गोवानी के इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड में निदेशक बनने के इतिहास को खंगालते हुए और विभिन्न न्यायायिक आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि रमेश घमंडीराम गोवानी इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक रहे हैं और उन्होंने 20.11.2019 को इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड से निवारक उपाय के तहत इस्तीफा दिया ताकि वे कानूनी जिम्मेदारी से बच निकले इसलिए न्याय निर्णयन अधिकार, एनसीएलटी, कोलकाता का वह आदेश गलत है जिसमें उसने रमेश घमंडीराम गोवानी को इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड का निदेशक नहीं माना था जबकि रमेश घमंडीराम गोवानी ने इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड की प्रबंधन की सभी शक्तियों को हड़प कर रखा था. अतः कमला मिल्स लिमिटेड और फस्क्वा इंवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड कंपनियां इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड की संबंधित कंपनियां हुई और इस लिहाजन कमला मिल्स और फस्क्वा इंवेस्टमेंट को लेनदारों की समिति का सदस्य बनाना गलत था. अपीलीय न्यायाधीकरण ने बैंकों द्वारा अपने अनर्जक आस्तियां (एनपीए) को प्राईवेट कंपनियों कमला मिल्स लिमिटेड और फस्क्वा इन्वेस्टमेंट प्राईवेट को बेचने के सवाल पर कहा कि चूंकि बैंक इसमें पक्षकार नहीं बने हैं अतः वे इस पर कोई फैसला नहीं दे सकते हैं. अपीलीय न्यायाधीकरण ने इसके बाद रिजोल्यूशन प्रोफेशनल की दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत उसकी विभिन्न धाराओं की विवेचना करते हुए उसकी वैधानिक स्थिति की जांच की और कहा कि रिजोल्यूशन प्रोफेशनल रमेश घमंडीराम गोवानी के साथ मिलकर आपराधिक साजिश की और इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ परिसमापन आदेश पारित करवाने में भूमिका निभाई. अपीलीय न्यायाधीकरण ने खुलासा करते हुए कहा कि रिजोल्यूशन प्रोफेशनल ने कमला मिल्स, फस्क्वा इंवेस्टमेंट और पेगाशस एसेट रिकंस्ट्रक्शन द्वारा किये गये क्रमशः 1555 करोड़, 267 करोड़ और 187 करोड़ (कुल 1742 करोड़) के अभूतपूर्व दावों की कोई जांच नहीं की और उन्हें लेनदारों की समिति का सदस्य बनाकर समिति से इंकैब कंपनी के परिसमापन का रिजोल्यूशन पारित करवाया और रमेश घमंडीराम गोवानी की मदद की. उपरोक्त टिप्पणियों के आधार पर अपीलीय न्यायाधीकरण ने न्याय निर्णयन अधिकार, एनसीएलटी, कोलकाता के 07.02.2019 के आदेश को निरस्त और खारिज करते हुए रिजोल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा की गयी तमाम कार्रवाइयों को भी निरस्त और खारिज कर दिया और दिवाला समाधान प्रक्रिया से 07.02.2019 से आज तक के सारे समय को हटा दिया यानि समाधान प्रक्रिया की शुरुआत 07.08.2018 से शुरू होकर केवल 07.02.2019 तक ही वैध मानी जायेगी. अपीलीय न्यायाधीकरण ने न्याय निर्णयन अधिकार, एनसीएलटी, कोलकाता को यह भी निर्देश दिया है कि वे सात दिनों के अंदर नया रिजोल्यूशन प्रोफेशनल बहाल करें और पुराने रिजोल्यूशन प्रोफेशनल शशि अग्रवाल का सारा प्रभार उसे दे दें. अपीलीय न्यायाधीकरण ने दिवाला और दिवालियापन बोर्ड ऑफ इंडिया से रिजोल्यूशन प्रोफेशनल शशि अग्रवाल के फर्जीवाड़ों के खिलाफ कानूनी कारवाई करने का निर्देश भी दिया है. कर्मचारियों की तरफ से उक्त तमाम सुनवाईयों में अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, संजीव मोहंती, चन्द्रलेखा और आकाश शर्मा ने हिस्सा लिया.





