
जमशेदपुर : टाटा स्टील और इंडो जर्मन साइंस व टेक्नॉलॉजी सेंटर के बीच एक एमओयू (मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी समझौता) पर हस्ताक्षर हुआ. टाटा स्टील के वीपी टेक्नॉलॉजी व न्यू मैटेरियल बिजनेस डॉ देवाशीष भट्टाचार्जी और इंडो जर्मन साइंस व टेक्नॉलॉजी सेंटर के इंटरनेशनल को-ऑपरेशन के हेड एसके वार्ष्णेय के बीच इस समझौता पर हस्ताक्षर हुआ. टाटा स्टील इसके जरिये मुख्य तौर पर इंडो जर्मन साइंस व टेक्नॉलॉजी सेंटर के साथ मिलकर नयी तकनीकों के विकास करने के साथ ही लीडरशिप को लेकर वर्कशॉप आयोजित कर मानव संसाधन के चौतरफा विकास की दिशा में कदम उठाना चाहती है. संयुक्त रिसर्च व नयी खोज के आधार पर नयी तकनीक को विकसित करने के साथ साथ नये मैटेरियल को तैयार करने पर काम करने और क्लाइमेट चेंज जैसे मुख्य विषयों पर काम करने के लिए यह समझौता कयिा गया है. इस समझौता पर हस्ताक्षर करने के दौरान जर्मन दूतावास के हेड इकॉनॉमिक डिपार्टमेंड के हेड व मंत्री डॉ स्टीफन नारबर्ट कोच, टाटा स्टील के न्यू मैटेरियल बिजनेस व इनोवेशन के साथ साथ ग्रैफाइन बिजनेस के चीफ कामेश गुप्ता समेत अन्य अधिकारी और साइंटिस्ट मौजूद थे. टाटा स्टील के वीपी टेक्नॉलॉजी व न्यू मैटेरियल बिजनेस डॉ देवाशीष भट्टाचार्जी ने बताया कि इस समझौता के जरिये भारत और जर्मनी के बीच मानव बुद्धि का एक सेतु बनेगा और विकास हो सकेगा जबकि वैश्विक तौर पर अत्याधुनिक तकनीकों के विकास करने में मदद मिलेगी जबकि महिलाओं को विज्ञान के क्षेत्र में आगे लाना भी एक महत्वपूर्ण उद्देश्य होगा. उद्योग अनुसंधान में युवा वैज्ञानिक को आगे लाना भी एक उद्देश्य होगा. कार्य प्रणाली वैश्विक कार्यशालाओं के रुप में होगी, जिसमें चुनौतियों को दूर किया जायेगा ौर चुनौतियों को किस तरह से दूर किया जाना है, इसकी भी खोज की जायेगी.






