
जमशेदपुर : टाटा स्टील की अधीकृत टाटा वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व के खिलाफ कमेटी मेंबर गोलबंद होने लगे है. इसकी बड़ी वजह है टाटा स्टील में सेफ्टी को देखते हुए दोपहिया वाहनों पर लगी पाबंदियां है. सेफ्टी के टाइमिंग के कारण कमेटी मेंबर अपने कर्मचारियों के हितों के काम नहीं कर पा रहे है जबकि कमेटी मेंबरों का यूनियन भी आना जाना बंद हो गया है. इसको लेकर विरोध के स्वर काफी तेज होते जा रहे है. टाटा वर्कर्स यूनियन की वर्तमान कमेटी के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह कमेटी मेंबरों की इन समस्याओं का हल नहीं खोज पा रहे है. शुक्रवार को यह मुद्दा तब गर्मा गया जब यह डिमांड उठ गयी कि जब कमेटी मेंबर और कर्मचारी यूनियन ही नहीं आयेंगे तो फिर टाटा वर्कर्स यूनियन के सारे 11 पदाधिकारी ड्यूटी से रिलीज क्यों रहेंगे. सारे 11 पदाधिकारी दिन में ड्यूटी करें और शाम के वक्त जब कर्मचारी या कमेटी मेंबर आने को होंगे तो वे लोग आकर यूनियन में बैठे. इससे यूनियन का आंतरिक खर्च भी कम हो जायेगा. बिजली का बिल कम आयेगा, पानी की खपत कम होगी और यूनियन पर कर्मचारियों की गाढ़ी कमायी का पैसा इसको मेंटेनेंस पर होने वाले खर्च में कमी आ जायेगी. कर्मचारियों के पैसे से यूनियन के अध्यक्ष, महामंत्री, डिप्टी प्रेसिडेंट गाड़ियों का इस्तेमाल करते है, आते जाते है, पेट्रोल-डीजल जलाते है, वह भी कम हो जायेगा. दूसरी ओर, ऑफिस बियरर कमेटी मेंबरों और कर्मचारियों का ग्राउंड रियेलिटी समझ पायेंगे. यह आवाज तो बुलंद तब हुआ, जब टाटा स्टील के एकाउंट्स और कारपोरेट सर्विसेज के कमेटी मेंबर ओम प्रकाश शर्मा उर्फ बमबम ने ऑफिस बियररों और कमेटी मेंबरों के वाट्सएप ग्रुप पर यह डिमांड उठा दिया. उन्होंने अपने डिमांड के साथ ही पीड़ा और हालात को बयां किया. इसका शीर्षक लिखा ”बिन घरनी, घर भूत का डेरा”. उन्होंने लिखा है कि टाटा वर्कर्स यूनियन के सम्मानित सभी कमेटी मेंबरों ने विगत कुछ वर्षों में कोविड-19 महामारी के दौरान जहां एक तरफ अपने कर्मचारियों की सेवा के साथ-साथ कंपनी के उत्पादन में भी अविस्मरणीय भूमिका निभाई है, वहीं आज टू व्हीलर मूवमेंट बाधित किए जाने के कारण उन्हीं कमेटी मेंबरों का अपने उन्हीं कर्मचारियों की समस्या को लेकर यूनियन पहुंच पाना तक दूभर हो गया है. दुखद है कि कमेटी मेंबर एवं पदाधिकारियों से भरा पूरा रहने वाला यूनियन आज दिन भर सन्नाटे से गुजर रहा है. उन्होंने लिखा है कि यह मजबूरी हो गई है कि हम कमेटी मेंबरों की कि हम अपनी ड्यूटी के बाद ही यूनियन आए. ऐसी परिस्थिति में ऑफिस बियररस का वहां पर दिन भर रहना कोई मतलब नहीं रखता और हम सबों के दृष्टिकोण से इसके कोई मायने नहीं है. कमेटी मेंबर बमबम ने सुझाव दिया है कि ऐसे में एक व्यवस्था की जा सकती है कि यूनियन के सभी पदाधिकारी दिन भर या तो आराम करें या अपने निर्देशित कार्यस्थल पर रहे और संध्या एवं रात्रि में यूनियन कार्यालय चलें. इससे एक फायदा यह होगा कि दिन भर अपने निर्देशित कार्य स्थल पर रहने से उन्हें कर्मचारियों एवं कमेटी मेंबरों को होने वाली तकलीफ का अंदाजा भी लगता रहेगा और प्रत्येक दिन संध्या वे इसके निराकरण का उपाय गंभीरता से करेंगे. उनके इस पोस्ट के बाद मानो उनकी तारीफ और उनके डिमांड को सही ठहराने के लिए थंब इंप्रेशन देने वालों की लाइन लग गयी. एलडी 3 के कमेटी मेंबर शशिकांत बेहरा ने जहां इस मुद्दे पर कमेटी मीटिंग बुलाने की मांग कर दी तो एलडी 3 के कमेटी मेंबर बंशीधर महतो ने भी इसका समर्थन किया. एलडी 3 के विकास कुमार दास, प्रदीप कुमार पाठक, एलडी 2 के कमेटी मेंबर राहुल श्रीवास्तव, एलडी 3 के श्याम बाबू, कोक प्लांट के संतोष कुमार मोहंती, आरएमएम के सौम्या रंजन दास, सीआरएम के कमेटी मेंबर सूरज कुमार, फील्ड मेंटेनेंस के श्याम सुंदर गोप ने भी सही डिमांड कहा. एचएसएम के कमेटी मेंबर निरंजन महापात्रा ने उनका समर्थन किया. इसी तरह फील्ड मेंटेनेंस मैकेनिकल के राजेश कुमार ने कहा कि कम से कम दो घंटे का रिलीज कमेटी मेंबरों को गाड़ी लेकर जाने का दिया जाना चाहिए. ए टू एफ ब्लास्ट फर्नेस के कमेटी मेंबर कुंदन कुमार सिन्हा ने बमबम के समर्थन में लिखा ”सोच तो लगभग सभी रहे होंगे, क्योंकि 203 कमेटी मेंबरों में कोई ऐसा नहीं होगा जो कि इस पीड़ा से प्रतिदिन रुबरु हो रहा होगा, फिर भी सबसे पहले बात को रखने के लिए बमबम का हार्दिक आभार. साथ ही उन्होंने उच्चाधिकारियों से निवेदन किया है कि इस पीड़ादायक घाव को कैंसर बनने से पूर्व ही इस पर संज्ञान लेकर उचित कदम उठाने की हिदायत दी है. कमेटी मेंबर श्याम बाबू ने कहा कि नहीं होता है तो इंडस्ट्री 4.0 लागू कर दिया जायेगा. यह नयी औद्योगिक क्रांति पर मैनेजमेंट भी चाहती है, जिससे डिजिटिलाइजेशन और वर्क फ्राम होम जैसी सुविधाएं शुरू कर दी जाये तो लाभ होगा. लगभग लोगों ने कहा है कि जब कमेटी मेंबर और कर्मचारी नहीं आयेंगे तो यूनियन में पदाधिकारियों का क्या है, आराम से या तो छुट्टी पर रहे या तो सभी कर्मचारियों की तरह वे लोग भी ड्यूटी करें, फिर शाम को यूनियन चलाये. फिलहाल, इसको लेकर माहौल गर्माता नजर आ रहा है. कमेटी मेंबरों ने कहा कि कहीं की घटना को लेकर जमशेदपुर में रोक लगाना गलत है.






