
जमशेदपुर : झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में हुए हजारों करोड़ के घोटाले के एसीबी जांच में सरायकेला के पूर्व प्रबंधक सुनील सत्पति की गिरफ्तारी के बाद एसीबी के रिमाण्ड में 12 बड़े-बड़े विभागीय अफसरों तथा बैंक के चेयरमैन की मिलीभगत का खुलासा हुआ है. बैंक में जनता के जमा पैसे के बंदरबांट में बैंक के चेयरमैन तथा नाजायज तरीके से बहाल मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने सारे घोटालों पर परदा डालकर दोनों हांथों से बैंक को लूटा. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद घोटालों के मुख्य सरगना मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को निबंधक सहयोग समितियां ने बर्खास्त करते हुए उनके वेतन मद में दी गयी एक करोड़ से अधिक की राशि चेयरमैन तथा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से वसूलने का आदेश जारी कर दिया है. बैंक में हुए घोटालों के कारण बैंक का एन.पी.ए. बढ़ते बढ़ते 35 फीसदी के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. बैंक की कुल जमा राशि 2500 करोड़ से घटते-घटते 1400 करोड़ रुपये के लगभग पहुंच गया है. घोटालों को छिपाने के लिए बैंक ने बैंक के डूब चुके सौ करोड़ से अधिक की राशि को एक हेलीकॉप्टर एकाउंट (रिसेस रिकॉल) में डाल दिया है तथा उसे राइट ऑफ करने की साजिश चल रही है. बैंक के ऑडिटर पर दबाव डालकर वर्ष 2019-20 के बैलेंस सीट में बोगस मुनाफा दिखाने का षडयंत्र भी चल रहा है जबकि घाटा 500 करोड़ के आसपास पहुंच गया है। इस घोटाले में बैंक तथा नाबार्ड के अधिकारी भी लिप्त बताये जा रहे हैं. बैंक प्रबंधन अपनी गर्दन बचाने के लिए एक जुनियर स्टाफ क्लर्क जितेश कुमार को जबरन मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी का प्रभार दे दिया, जिसे जितेश कुमार ने अस्वीकार कर दिया पर उस पर लगातार बोगस बैलेंस सीट पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जा रहा है. इधर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सहकारिता बैंक में हो रहे घोटाले को देखते हुए उनका प्रबंधन सीधे अपने हांथों में लेने का मन बना लिया है, जिसे लेकर आज केन्द्रीय मंत्रियों की बैठक के बाद अधिसूचना भी जारी की गयी है.






