बहरागोड़ा: बहरागोड़ा के ग्रामीण क्षेत्र में मानसून की तेज बारिश के साथ ही काजू के घने जंगलों में प्राकृतिक खुखड़ी (जंगली मशरूम) बहुतायत में निकलने लगी है. पूरी तरह से जैविक, स्वाद से भरपूर और प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत मानी जाने वाली इस प्राकृतिक खुखड़ी की स्थानीय बाजारों में जबरदस्त मांग है. बहरागोड़ा के कोटशोल, जामीरडीहा,पाथरा, मानुषमुड़िया, केशरदा, बनकाटा, गुहियापाल,माटिहाना,बांसदा,पाथरी,डिंगाशाई,कुलियंक, तिलो,भण्डारशोल जैसे गांवों के ग्रामीण जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं. (नीचे भी पढ़े)

जंगलों से ताजा खुखड़ी चुनकर लाने के बाद ग्रामीण इसे बहरागोड़ा,बेंदा, चौरंगी, कुमारडुबी और खाण्डामौदा के बाजारों में ले जाकर बेच रहे हैं. बाजार में यह प्राकृतिक मशरूम 300 से 550 रुपये प्रति किलो के भाव में हाथों-हाथ बिक रही है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह खास खुखड़ी पूरे साल में केवल सावन और भादो के महीने में महज 15 से 20 दिनों के लिए ही उगती है. सीमित समय के लिए उपलब्धता और विशिष्ट स्वाद के कारण इसकी मांग काफी ज्यादा रहती है.(नीचे भी पढ़े)
आदिवासी परिवारों के लिए आजीविका का जरिया: मौसम का यह प्राकृतिक उपहार स्थानीय गरीब और आदिवासी परिवारों के लिए मौसमी रोजगार का एक बड़ा साधन बन चुका है. जंगल जाने वाला एक व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 2 से 3 किलो तक खुखड़ी आसानी से चुन लेता है, जिससे उन्हें दैनिक आधार पर अच्छी-खासी आमदनी हो जाती है. बाजार में स्थानीय भाषा में बड़ा खुखड़ी और धूसा खुखड़ी अथवा छातु के नाम से मशहूर इस किस्म की मांग सबसे अधिक है जिसे लोग बड़े चाव से खरीद रहे हैं.





