
रांची/जमशेदपुर : पहले झारखंड से झामुमो और फिर पश्चिम बंगाल के तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सांसद रह चुके केडी सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने गिरफ्तार कर लिया है. बुधवार को इडी ने उनको मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है. उनको गिरफ्तार करने के लिए काफी दिनों से काम चल रहा था. बताया जाता है कि मनी लांड्रिंग मामले में केडी सिंह अपनी सारे ट्रांजैक्शन की जानकारी नहीं दे सके थे, जिस कारण उनको गिरफ्तार किया गया है. वैसे तृणमूल कांग्रेस ने यह सफाई दे दी है कि अब उनका किसी तरह का कोई संबंध पार्टी के साथ नहीं है. इस मसले को लेकर भाजपा ने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा है कि केडी सिंह की कंपनी ने लाखों लोगों से धोखेबाजी की है और उनकी संपत्ति को सीज कर दिया गया है. पूर्व सांसद केडी सिंह के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की ओर से छापामारी की गयी थी, जहां से जरूरी दस्तावेज, विदेशी करेंसी और कैश को बरामद किया गया था. इसको लेकर 2018 में केडी सिंह पर पीएमएलए के तहत केस शुरू किया गया था. केडी सिंह की कंपनी अलकेमिस्ट इंफ्ररा रियलिटी लिमिटेड पर प्रवर्तन निदेशालय ने 2016 में मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में पीएमएलए के तहत दर्ज किया गया था. आरोप लगाया गया है कि इस कंपनी ने लोगों को करीब 1900 करोड़ रूपये का चूना ल गा दिया था. सेबी की ओर से कंपनी, इसके डायरेक्टर और शेयर होल्डर पर मामला दर्ज कराया गया था. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पहले भी केडी सिंह की संपत्ति को सीज कर दिया गया था. केडी सिंह की करीब 239 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गयी थी. इसमें बैंक खाते, शो रूम, रिसोर्ट शामिल थे. इस दौरान केडी सिंह की वह फाइल भी इडी के हाथ लगी है, जिसमें करोड़ों रुपये में सोनारी एयरपोर्ट स्थित अलकेमिस्ट एविएशन की डीलिंग हुई थी. इस अलकेमिस्ट एविएशन को कुछेक सालों पहले केडी सिंह ने बेच दी थी, जिसको झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और शिबू सोरेन के आप्त सचिव रह चुके मनोहर पाल के पुत्र मृणाल कांति पाल ने खरीद ली थी. साल 2015 में यह डील करोड़ों में हुई थी. सोनारी रोड नंबर इ-वेस्ट ले आउट निवासी मृणाल कांति पाल ने नयी दिल्ली के पंचशील पार्क निवासी महावीर प्रसाद रुंगटा और पटना के कंकड़बाग स्थित आकांक्षा इंक्लेव निवासी अपूर्व सोनल पार्टनर है. मिनिस्ट्री ऑफ कारपोरेट अफेयर्स के रिकॉर्ड में 17 फरवरी 2015 को मृणाल कांति पाल को एमडी, महावीर प्रसाद रुंगटा को एडिशनल डायरेक्टर और अपूर्व सोनल को अतिरिक्त निदेशक बनाया गया था. इस डील से संबंधित दस्तावेजों की जांच होगी तो झारखंड की राजनीति में भी उथल-पुथल मच सकती है.






