
नयी दिल्ली : झारखंड के धनबाद के जज उत्तम आनंद की हत्या के मामले में सीबीआइ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक लिफाफाबंद रिपोर्ट सौंपी. सोमवार को इस हत्या की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने की. इस मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि सीबीआइ की रिपोर्ट में कुछ खास नहीं है. रिपोर्ट में अपराध के पीछे मकसद या कारण के बारे में कुछ नहीं बताया गया है. इस दौरान सॉलिसिटर जेनरल ने जवाब दिया है और बताया है कि केस का डेवलपमेंट अब तक क्या है. इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि तुषार मेहता जी, यह वह मुद्दा नहीं है, जो हम चाहते हैं, कुछ ठोस हम चाहते हैं. आपके लोगों ने मकसद या कारण के बारे में कुछ भी संकेत नहीं दिया है. इसके जवाब में सॉलिसिटर जेनरल ने कहा कि गाड़ी से जज को टक्कर मारने वाले गिरफ्तार हो चुके है और इससे ज्यादा अभी खुलासा नहीं हो सकता है क्योंकि आरोपी से पूछताछ चल रही है. चीफ जस्टिस के साथ पीठ में जस्टिस सूर्यकांत और विनीत शरण भी शामिल थे. पीठ ने आदेश जारी किया कि झारखंड हाईकोर्ट को जांच की हर सप्ताह रिपोर्ट सीबीआइ देगा और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इस केस की खुद मोनिटरिंग करेंगे. सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ ने स्वत: संज्ञान में झारखंड के जज की हुई हत्या के मामले को लिया था. इसके बाद इस केस को 2019 में जजों और अदालतों की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका के साथ टैग कर दिया. इस मामले में पहले ही राज्यों और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया जा चुका है. पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की और नोट किया कि इस अदालत ने देश में खतरनाक स्थिति को हल करने का प्रयास करने के लिए इस मामले को उठाया है, जहां वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को आतंकित किया जा रहा है. पीठ ने केंद्र सरकार और राज्यों की सरकारों से कहा कि सुप्रीम कोर्ट को उम्मीद है कि वे लोग सभी जवाबी हलफनामा दाखिल करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मामले में जांच की प्रगति से अदालत को अवगत कराने के लिए अगली सुनवाई में सीबीआइ की उपस्थिति की मांग की थी. पीठ ने 2019 में दायर एक याचिका पर न्यायाधीशों और अदालतों के लिए एक विशेष सुरक्षा बल की मांग की गयी थी. चीफ जस्टिस ने कहा कि हालांकि, रिट याचिका 2019 में दायर की गयी थी, जिसमें केंद्र सरकार ने अब तक जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया है. इसके अलावा जज उत्तम आनंद की मौत के मामले में झारखंड राज्य की लापरवाही को चिन्हित करते हुए सभी राज्यों को जवाब देने और न्यायिक अधिकारियों को किस तरह की सुरक्षा प्रदान की है, इस संबंध में स्टेट रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जुलाई को मामले को स्वत: संज्ञान में लिया था. पीठ ने कहा कि देश भर रमें हो रही इस तरह की घटनाओं को देखते हुए न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और कानून से जुड़े लोगों के हितों के मुद्दे की विस्तृत जांच के लिए इस मुद्दे पर व्यापक विचार विमर्श करना जरूरी है.




