
रांची : झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस और झारखंड सरकार के बीच तल्खी अब तेज होता नजर आ रहा है. अब अपने पदस्थापन के करीब 6 माह के बाद राज्यपाल रमेश बैस ने अब कदम उठाना शुरू कर दिया गया है. राज्य सरकार के खिलाफ लगातार कदम उठाया जा रहा है. इस कड़ी में राज्यपाल रमेश बैस ने ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी (टीएसी) के नियमावली में बदलाव का निर्देश देते हुए पत्र लिख दिया है. अपने पत्र में राज्यपाल ने कहा है कि राज्यपाल के अधिकारों और शक्तियों का अतिक्रमण किया जा रहा है. टीएसी का गठन को लेकर किसी तरह का कोई चर्चा राज्यपाल से नहीं की गयी थी. टीएसी में राज्यपाल को दो सदस्यों को नियुक्त करने की शक्ति होनी चाहिए. लेकिन एक भी नियुक्ति के लिए राज्यपाल से कोई सलाह नहीं ली गयी. जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. उन्होंने अटॉर्नी जेनरल केके वेणुगोपाल और दूसरे विधि विशेषज्ञों की राय का सवाला देते हुए लिखा है कि पांचवीं अनुसूची के मामले में कैबिनेय की सलाह मानने को राज्यपाल बाध्य नहीं होता है. सरकार को अनुमोदन के लिए राज्यपाल के पास हर हाल में भेजना चाहिए था. आपको बता दें कि झारखंड में टीएसी बनाने को लेकर सारी शक्तियां राज्यपाल की छीन ली गयी थी और कैबिनेट की बैठक कर राज्यपाल को दरकिनार कर हेमंत सोरेन की सरकार ने टीएसी का गठन कर दिया, जिसके चेयरमैन खुद मुख्यमंत्री को बना दिया गया जबकि पहले राज्यपाल होते थे. बताया जाता है कि यह कदम हेमंत सोरेन की सरकार ने इस कारण उठाया क्योंकि तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने टीएसी के गठन को लेकर भेजे गये फाइल को दो बार लौटा दिया था. जिसके बाद हेमंत सोरेन की सरकार ने राज्यपाल के अधिकार को ही हटा दिया है. वहीं, उसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विरोध कर दिया और फिर राज्यपाल के अधिकार को ही हटाकर कैबिनेट में फैसला ले लिया कि इसके चेयरमैन मुख्यमंत्री को बना दिया गया है.
नयी उत्पाद नीति का फाइल भी राज्यपाल ने मंगायी
दूसरी ओर, झारखंड की नयी उत्पाद नीति पर राजभवन ने फाइल मंगा ली है. राज्यपाल के निर्देश पर उत्पाद आयुक्त अमित कुमार ने विभागीय सचिव को इसकी फाइल भेज दी थी, लेकिन राज्यपाल के तलब के बावजूद अब तक नयी उत्पाद नीति की फाइल उनको नहीं भेजी गयी है. राजस्व के मामले में राज्यपाल को सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने का विशेष अधिकार है. वे इस बात को देख सकते हैं कि सरकार की किसी नीति से राजस्व को नुकसान की संभावना तो नहीं है. इसी अधिकार के तहत राज्यपाल ने इस फाइल की मांग की है. अब राज्यपाल ओएसडी से पूरी फाइल की समीक्षा करा सकते हैं. जरूरत पड़ने पर महाधिवक्ता से राय ले सकते हैं. सरकार को उसमें सुधार करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा कर सकते हैं. इस मामले की शिकायत भाजपा के सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने की है. उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के समक्ष इसका विरोध दर्ज कराया है.




