
रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैदराबाद से रांची पहुंच चुके है. हैदराबाद से आने के बाद वे सीधे रांची के प्रोजेक्ट भवन पहुंचे, जहां उन्होंने बैठक शुरू की. वे अपने अधिकारियों के साथ बैठक की है और कई जानकारों से भी रायशुमारी की है. उनके मुख्य सिपाहसलार और झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य नयी दिल्ली में कैंप कर कानूनी बारीकियों को समझने की कोशिश कर रहे है. बताया जाता है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चुनाव आयोग को अपना जवाब देंगे जबकि उनके भाई विधायक बसंत सोरेन भी अपना जवाब दाखिल करने वाले है. वैसे संभव है कि हेमंत सोरेन जवाब दाखिल करने के लिए समय मांग लें. इसका भी इंतजार किया जा रहा है. वैसे चुनाव आयोग से जवाब देने के लिए तैयारी की जा रही है. 10 मई तक यह जवाब दाखिल किया जाना है. वही, वे चाहे तो राजभवन जाकर खुद से इस्तीफा बी दे सकते है. ऐसे में गुरुजी शिबू सोरेन को वे मुख्यमंत्री बना सकते है. आपको बता दें कि भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की खनन पट्टा मामले में नोटिस जारी की गयी है. खनन पट्टा आवंटन मामले के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपना जवाब दाखिल कर दिया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के वकील अमृतवांश वत्स ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर बताया है कि इस मामले को लेकर चुनाव आयोग की ओर से सुनवाई की जा रही है. नोटिस जारी की गयी है. चुनाव आयोग से की गयी शिकायत और याचिका में कई बातें सामने आयी है. यह मामला कहीं न कहीं राजनीति से प्रेरित है. इस मामले के शिकायतकर्ता शिवशंकर शर्मा के क्रेडिटिबिलिटी पर भी कोटर्भ में सवाल उठाये गये है. हाईकोर्ट के नियम के मुताबिक, शिकायतकर्ता को पूरी जानकारी दी जानी चाहिए थी. कोर्ट में यह बताया गया है कि शिवशंकर शर्मा के पिता डॉ गौतम शर्मा है. यह बताया गया है कि डॉ गौतम शर्मा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिता और गुरुजी शिबू सोरेन के दिल्ली में दर्ज एक मामले में गवाह थे. इसमें शिबू सोरेन को सजा हुई थी, लेकिन दिल्ली कोर्ट ने सजा को निरस्त कर दिया था. उनके बेटे शिवशंकर शर्मा याचिकाकर्ता है, जिस कारण यह साजिश का हिस्सा है. यह बताया गया है कि शिकायतकर्ता का परिवार पहले से ही उनका विरोधी है, इस कारण वह इस तरह के मामले में बेवजह फंसाने की कोशिश कर रहा है और यह याचिका सुनवाई योग्य नहींह है, इसे भारी जुर्माने के साथ खारिज करना चाहिए. हेमंत सोरने ने कहा है कि जहां तक माइनिंग लीज का सवाल है तो उन्हें पूरे नियमों के तहत यह लीज मिला था, लेकिन उन्हें इसके संचालन का कंसेंट नहीं मिला था. इस बीच फरवरी 2022 को उन्होंने बिना खुदाई किये लीज को सरेंडर कर दिया है. जब याचिका दायर की गयी, उस वक्त माइनिंग लीज उनके पास नहीं थी, इस कारण इस केस को खारिज करना चाहिए.





