
जमशेदपुर : वट सावित्री पूजा में नहीं दिखा सुहागिनों में कोरोना का खौफ. सुबह से ही महिलाएं मंदिरों और वट वृक्ष के पेड़ के आसपास पूजा करती नजर आई. जहां सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु की कामना की. वैसे प्रशासनिक व्यवस्था की अगर हम बात करें तो किसी भी मंदिर अथवा वटवृक्ष के आसपास प्रशासन की कोई तैनाती नजर नहीं थी. जिससे महिलाएं सोशल डिस्टेंसिंग को भूल पूजा पाठ करती नजर आई.

वैसे बड़ी संख्या में महिलाओं ने घर पर ही वटवृक्ष की डाली की पूजा अर्चना की और अपने पति के लंबी आयु की कामना की. बरगद का विशाल पेड़ होता है, जिसकी कई जटाएं होती है. ऐसे ही बरगद पेड़ का काफी महत्व होता है. पेड़ के नीचे सावित्री ने अपने पति के दीर्घायु होने के लिए कामना करती है. हिंदू रीति-रिवाज के मुताबिक, बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश रहते है. मान्यता यह है कि ब्रह्मा पेड़ की जड़ में, भगवान शिव ऊपरी भाग में रहते है जबकि भगवान विष्णु तन में रहते है. इस पेड़ के नीचे बैठकर पूजा की जाती है, जिसके आधार पर मनोकामना पूरी की जाती है. इस दौरान महिलाएं मिट्टी के दिये, घी, फूल, फल, 22 पुरी, 24 बरगद फल यानी आटे या गुड़, बांस का पंखा, लाल धागा, कपड़ा, सिंदूर, जल से भरा हुआ पात्र और रोली से पूजा की जाती है.







