
जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज में एनजीओ नेचर (नेशनल अवेयरनेस ट्रेनिंग एंड रिसर्च फॉर अर्बन रूरल डेवलपमेंट) के सहयोग से शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया. वेबिनार का विषय था-पर्यावरण व जैव विविधता पर कोविड-19 का प्रभाव. मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कोल्हान विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति व वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या डॉ शुक्ला महंती ने वेबिनार की विधिवत शुरुआत की. अपने वक्तव्य के आरंभ में उन्होंने बताया कि यह महामारी एक हद तक पर्यावरण के लिए कैसे वरदान साबित हुई है. उन्होंने कहा कि इस महामारी के फलस्वरूप लॉकडाउन के कारण हवा, जलमार्ग आदि में स्वच्छता आयी है. वहीं दूसरी तरफ उन्होंने इस तथ्य को भी प्रस्तुत किया कि अब नये कचरे ग्लव्स व मास्क की तरह विकसित किये जा रहे हैं. डॉ महंती ने उम्मीद जतायी कि इस कठिन समय को साथ मिल कर पार करने के साथ ही पृथ्वी को विनाश से बचाया जा सकता है.

अन्य वक्ता सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पूरबी सैकिया ने दुनिया भर में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस पर विस्तृत चर्चा की. उन्होंने अर्थव्यवस्था, परिवहन और इस पर कोरोना वायरस महामारी के दुष्प्रभावों को विस्तार से प्रस्तुत किया, जिसने पूरी दुनिया की जीवन शैली को भी प्रभावित कर दिया. उन्होंने एक प्रजेंटिशन भी दिया, जिस पर चर्चा सत्र का आयोजन किया गया. नेचर की मुख्य कार्यकर्ता डॉ कविता परमार ने विश्व में जैव विविधता पर कोविड-19 के प्रभावों की चर्चा की. वेबिनार में विभिन्न कॉलेजों के फैकल्टी व विद्यार्थी तथा 374 प्रतिभागी शामिल हुए. कॉलेज की बॉटनी विभाग की डॉ सालोमी कुजूर ने धन्यवाद ज्ञापन किया.







