
रांची : नियोजन नीति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाइकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है. शनिवार को शीर्ष कोर्ट में नियोजन नीति पर झारखंड हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इस दौरान पंचायत सचिव नियुक्ति को लेकर सुष्मिता कुमारी की ओर से नियोजन नीति पर झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन आदेश देने से इंकार कर दिया. दरअसल इस दौरान 11 गैर अनुसूचित जिलों के अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने सुनवाई के क्रम में अदालत से कहा कि अगर नियोजन नीति के मामले में झारखंड हाइकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई जाती है तो गैर अनुसूचित जिलों में होने वाली कई नियुक्तियां भी प्रभावित होंगी इसलिए स्थगन आदेश नहीं लगाया जाए. अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए हाइकोर्ट के आदेश पर स्थगन लगाने से इंकार कर दिया. साथ ही, राज्य सरकार, जेएसएससी सहित अन्य को नोटिस जारी किया है. हालांकि अदालत ने सत्यजीत कुमार मामले में दिए हुए अपने पूर्व के आदेश को बरकरार रखा. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने हाई स्कूल में नियुक्त शिक्षकों को हटाए जाने पर फिलहाल रोक लगा रखी है. इसके बाद अदालत ने इस मामले में अंतिम सुनवाई के लिए फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में तिथि निर्धारित करने का आदेश दिया है. वैसे आपको बता दें कि 21 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में नियोजन नीति को गलत मानते हुए शिक्षकों की नियुक्ति को गलत माना था. इस मामले को लेकर 15 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जिसके दौरान यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया गया था और झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है. (नीचे पढ़ें परिवार नियोजन के लिए क्या है आदेश)
जनसंख्या नियंत्रण पर केंद्र ने कहा-परिवार नियोजन के लिए बाध्य नहीं कर सकते
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया है कि भारत अपने लोगों को परिवार नियोजन के लिए बाध्य करने और बच्चा पैदा करने की संख्या निर्धारित करने के खिलाफ है. सरकार ने कोर्ट को बताया है कि ऐसा करना जनसांख्यिकीय विकृतियों की ओर ले जाता है. सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामें में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि देश में परिवार कल्याण कार्यक्रम स्वैच्छिक है, जो लोगों को उनका परिवार कितना बड़ा हो तय करने और बिना किसी मजबूरी के परिवार नियोजन के तरीकों को अपनाने में सक्षम बनाता है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जवाब बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर एक जनहित याचिका के जवाब में दिया है.





