
सरायकेला : राजनीति में हर कोई सिर्फ इसलिए आना चाहता है, ताकि वह भी सत्ता और शासन- प्रशासन के इर्द- गिर्द अपनी पहचान बना सके. किस्मत का सितारा अगर बुलंद हो तो राजनीति के शिखर पर भी पहुंच सके. राजनीति के वर्तमान परिदृश्य खासकर भाजपा की राजनीति में एक वार्ड स्तर का नेता भी काफी रसूख रखता है, लेकिन आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि 1980 से भाजपा की सक्रिय राजनीति में अहम भूमिका निभा रहा एक शख्स आज भी किराए की गाड़ी पर चलता है. शरीर पर भगवा धारण किए अपने बूढ़े मां- बाप, तीन बच्चों और पत्नी की जिम्मेवारी छोड़ पार्टी का झंडा ढोते-ढोते इतना पिछड़ गया कि आज भी वह फटेहाल जीवन जी रहा है. सरायकेला- खरसावां जिला से लेकर प्रदेश और अविभाजित बिहार का शायद ही कोई जनसंघी या भजपाई होगा जो गोवर्धन राउत को नहीं पहचानता होगा. इनके साथ राजनीति का ककहरा सीखनेवाले अब राजनीति से सन्यास की ओर कदम बढ़ा चुके हैं, लेकिन भगवाधारी गोवर्धन राउत को आज भी सरायकेला के सरकारी दफ्तरों और सड़कों पर हाथों में फाइल लिए गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भटकते देखा जा सकता है. (नीचे भी पढ़ें)
पैरों से लाचार गोवर्धन राउत बताते हैं जीवन में सबकुछ लुटा चुका हूं एक अदद मकान तक न बनवा सका. न ही बच्चों को महंगी शिक्षा दिला सका. लक्जरी गाड़ियां तो दूर किराए पर खरसावां से जिला मुख्यालय गरीबों का काम लेकर आने के लिए भी लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है. उन्होंने बताया कि राजनीति का ककहरा उन्होंने कोल्हान के कद्दावर जनसंघी स्व. रुद्र प्रताप षाड़ंगी से सीखा. युवावस्था में उनका सानिध्य मिला उस समय नहीं पता था राजनीति में गॉडफादर के साथ पैसों की भी अहमियत होती है. स्व. रुद्र प्रताप का विश्वास पात्र होने के कारण उस जमाने में सभी सरकारी काम आसानी से हो जाते थे. अविभाजित बिहार से लेकर वर्तमान झारखंड के लगभग सभी पुराने जनसंघियों एवं भाजपाइयों से परिचित गोवर्धन आज अपने वजूद को जिंदा रखने मात्र के लिए संघर्षरत नजर आते हैं. उन्होंने बताया कि इस बात का मलाल रह गया कि अपनों के लिए कुछ न कर सका. पार्टी के लिए बूढ़े मां बाप पत्नी और बच्चों के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने से चूक गया. आरपी बाबू के जाने के बाद थोड़े दिनों तक खूंटी से सांसद रहे पूर्व लोकसभा के उप सभापति कड़िया मुंडा ने सहारा दिया, लेकिन अब उनके सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने के बाद अब कोई राजनीतिक सरपरस्ती न रही. केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा थोड़ा बहुत हाल चाल पूछ लिया करते हैं मगर अन्य किसी को कोई मतलब नहीं रहा.




