
जमशेदपुर : टाटा स्टील के रिटायर कर्मचारियों और टाटा स्टील के निबंधित पुत्रों एक संयुक्त बैठक रविवार को हुई। बैठक मे संयुक्त रूप से टाटा वर्कर्स यूनियन और टाटा स्टील मैनेजमेन्ट के समक्ष ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगे रखने का निर्णय हुआ। बैठक में टाटा स्टील के रिटायर कर्मचारियों ने कहा कि जब तक स्व बीजी गोपाल जीवित थे तबतक ही निबंधित पुत्रों के प्रति संवेदना टाटा स्टील मैनेजमेन्ट और टाटा वर्कर्स यूनियन में दिखती थी। आज निबंधित पुत्र इनके लिए बस एक आंकड़े है। निबंधितों की बदहाली, भुखमरी और बेरोजगारी से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने ने कहा कि आज इस करोना काल में जहां लाखों के पैकेज वेतन पाने वाले टाटा स्टील के अधिकारी अपने-अपने घरों से वर्क फर्म होम कर रहे हैं, वही वर्ष 2008 और 2011 में बहाल हुए निबंधित पुत्र आज अपनी जान और अपने परिवार की चिंता किये बगैर पूरी निष्ठा के साथ कंपनी परिसर में जाकर अपनी निष्ठा और कर्मठता का प्रमाण दे रहे है। आज वैसे ही कई निबंधित पुत्रों को वर्ष 2019 से अबतक पुत्रों बहाली से दूर रखना तथा फार्म जमा होने के 30 दिनों के बाद भी नियोजन की प्रकिया शुरू नहीं करना स्टील मैनेजमेंट और टाटा वर्कर्स यूनियन को सवालों के कटघरे में खड़ा करता है। (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि एक ओर इस कोरोना काल में टाटा स्टील जहां 200 रोजगार पूरे झारखंड में दे रहा है वहीं दूसरी ओर अपने निबंधित पुत्रों के नियोजन की प्रक्रिया में क्यों देरी कर रहा है। अपने बच्चों को भूखा रखकर पूरे मोहल्ले में भोज कराना यह कैसी नैतिकता है? उन्होंने कहा कि जब तक आर रवि प्रसाद टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष थे तब तक उन्होंने भी जहां-जहां जरूरत पड़ी वहां-वहां निबंधित की बहाली के लिए टाटा स्टील मैनेजमेंट के साथ बात की। पर इस बार जो चुनी हुई यूनियन आई है, ऐसा लगता है वह केवल अपने विशेष जाति वर्ग के हाथों उनके विशेष मंचों पर सम्मानित होने के लिए आई है। उनके लिए निबंधित पुत्रों का नियोजन और अपने कर्मचारियों का हित जरूरी नहीं है। उन्होंने अभी कुछ दिन पहले एक वर्चुअल मीटिंग की गयी थी, उस मीटिंग में निबंधितो की बहाली में हो रही देरी, इनके लिए मुद्दा ही नहीं था। (नीचे भी पढ़ें)
निबंधित पुत्रों ने कहा कि जिस तरह से बर्ष 2019 में हुए निबंधितो के नियोजन के समझौते को वर्ष 2021 में शुरू कर उम्र के आधार पर कई निबंधित पुत्रों को इस बहाली से वंचित कर दिया गया लगता है, ठीक उसी प्रकार टाटा स्टील मैनेजमेंट और टाटा वर्कर्स यूनियन चाहती है इस कोरोना महामारी के काल के गाल में कुछ निबंधित समा जाए ताकि उनकी संख्या और कुछ कम हो जाए, तब कहीं जाकर नियोजन की प्रकिया शुरू करें । अगर ऐसा नहीं है तो जल्द से जल्द निबंधितो की बहाली प्रकिया इसी महीने शुरू करें। निबंधित पुत्रों ने कहा कि जब हम फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग कर पूरे भारत में यह बात उठा सकते हैं, तो क्या अपने नियोजन की मांग इन माध्यमों से नहीं कर सकते। लेकिन हम नहीं चाहते हैं कि किसी भी तरह टाटा स्टील कंपनी की गरिमा को कोई ठेस पहुंचे। इसीलिए हम बार-बार टाटा स्टील मैनेजमेंट और टाटा वर्कर्स यूनियन से निवेदन कर रहे हैं कि कृपया हमारी आर्थिक स्थिति का अवलोकन करें और ये बताने का कष्ट करें की हमारे नियोजन प्रकिया में क्यों इतना विलम्ब हो रहा हैं? बैठक में रिटायर टाटा स्टील कर्मचारी: पीके राव, एस कुमार, जी पाल, राम केश, ए कुमार, बीके पांडेय, निबंधित पुत्र-पुत्रि बबिता नाग, बेबी तान्डी, राकेश कुमार, उमेश कुमार, चन्द्र शेखर, रंजीत कुमार, राजेश कुमार व अन्य उपस्थित थे.












